रणथंभौर टाइगर रिजर्व के जोगी महल वन क्षेत्र में सोमवार दोपहर वन कर्मचारियों को घायल अवस्था में एक नर कछुआ मिला। उसके शरीर पर दूसरे वन्यजीव के काटने के निशान थे और घावों में मैगट के लार्वा पाए गए। पशुपालन विभाग की वेटरनरी टीम ने कछुए को रेस्क्यू कर इंजेक्शन दिए और घावों का उपचार किया। फिलहाल उसे रणथंभौर के वाइल्ड लाइफ हॉस्पिटल में निगरानी में रखा गया है। घावों में मिले मैगट के लार्वा वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर करीब 12 बजे जोगी महल वन क्षेत्र में तैनात वन कर्मचारियों को घायल अवस्था में कछुआ मिला। कर्मचारियों ने इसकी जानकारी वन अधिकारियों को दी। इसके बाद पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. चंद्रप्रकाश मीणा ने नर कछुए को रेस्क्यू किया और रणथंभौर टाइगर रिजर्व के वाइल्ड लाइफ हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। जांच के दौरान कछुए के शरीर पर दूसरे वन्यजीव के काटने के निशान मिले। उसके घावों में मैगट के लार्वा भी पाए गए। वेटरनरी टीम ने कछुए को जरूरी इंजेक्शन दिए और घाव भरने की दवाइयों से उपचार किया। इसके बाद उसे वाइल्ड लाइफ हॉस्पिटल में ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। हालत सुधरने के बाद जंगल में छोड़ेंगे घायल कछुए का उपचार डीएफओ मानस सिंह के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। मेडिकल ऑब्जर्वेशन के दौरान उसके घावों से मैगट के लार्वा पूरी तरह खत्म होने और उसकी स्थिति में सुधार आने के बाद उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ने की योजना है। इसके लिए सीसीएफ एवं रणथंभौर टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर शारदा प्रताप सिंह के निर्देशन में आगे की कार्रवाई की जाएगी। शेड्यूल-1 में शामिल है कछुआ डॉ. चंद्रप्रकाश मीणा ने बताया कि कछुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की शेड्यूल-1 में शामिल संरक्षित वन्यजीव है। पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने में कछुओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कछुए जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के साथ-साथ अपने प्राकृतिक आवास के पर्यावरणीय संतुलन में भी योगदान देते हैं। घायल नर कछुए का वन विभाग और वेटरनरी टीम की निगरानी में उपचार जारी है। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।