जब आप पहले से ही एक सरकारी अधिकारी हैं, तो फिर सिविल सेवा (RAS) में क्यों आना चाहते हैं और अलग क्या करना चाहते हैं? ‘एकात्म मानववाद’ आज के समय में कितना उपयोगी है और इसे वर्तमान जीवन में कैसे लागू किया जा सकता है? ये वही सवाल थे जो RAS इंटरव्यू में पूछे गए। इन सवालों के जवाब ने चित्तौड़गढ़ जिले के सादी गांव के विनोद चौधरी की दिशा तय कर दी। मजबूत सोच और स्पष्ट जवाब के दम पर उनका चयन हुआ और उन्होंने राजस्थान में 54वीं रैंक हासिल की। विनोद चौधरी इस समय उत्तर प्रदेश के आगरा में कृषि विभाग में प्रविधिक अधिकारी (कृषि तकनीकी सहायक) के पद पर कार्यरत हैं। ‘एकात्म मानववाद’ के सवाल पर दिया जवाब बना टर्निंग पॉइंट RAS इंटरव्यू में अक्सर सामान्य ज्ञान के साथ-साथ उम्मीदवार की सोच, नजरिया और समझ को परखा जाता है और विनोद चौधरी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनसे सीधे-सीधे किताबों वाले सवाल कम और जीवन, समाज और विचारधारा से जुड़े सवाल ज्यादा पूछे गए। ‘एकात्म मानववाद’ पर सवाल आने के बाद उन्होंने जो जवाब दिया, वही उनके इंटरव्यू का टर्निंग पॉइंट बना। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का विकास केवल आर्थिक या केवल सामाजिक नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका हर पहलू मजबूत होना चाहिए। व्यक्ति को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से संतुलित होना चाहिए। उन्होंने समझाया कि आज के समय में जहां भौतिकता तेजी से बढ़ रही है, वहीं अध्यात्म को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर दोनों के बीच संतुलन बना रहे, तो ही सही मायनों में विकास संभव है। उनके इस जवाब इंटरव्यू पैनल को प्रभावित किया। ‘आप पहले से अधिकारी हैं, फिर RAS क्यों?’ इस सवाल ने बदली धार दूसरा सवाल जो सबसे ज्यादा जरूरी रहा, वह था- जब आप पहले से एक सरकारी अधिकारी हैं, तो फिर RAS में क्यों आना चाहते हैं? इस सवाल में असल में उनकी सोच और लक्ष्य को समझने की कोशिश की गई थी। विनोद ने बहुत ही सीधे और सरल शब्दों में जवाब दिया कि सिविल सेवा में सबसे बड़ी ताकत ‘एक्सेस’ होती है। उन्होंने कहा कि एक विभाग में रहकर काम करने की अपनी सीमाएं होती हैं, लेकिन सिविल सेवा में आने के बाद कई विभागों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर काम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य केवल एक पद या विभाग में काम करना नहीं है, बल्कि समाज के लिए ज्यादा प्रभावी तरीके से काम करना है। यह जवाब भी पैनल को काफी अच्छा लगा। गीता, किसान और AI पर भी पूछे गए थे सवाल विनोद चौधरी ने बताया कि इंटरव्यू के दौरान उनसे गीता और गीता दर्शन से जुड़े सवाल भी पूछे गए। यहां पर भी उन्होंने रटकर जवाब देने के बजाय अपनी समझ के अनुसार बात रखी। उन्होंने जीवन में कर्तव्य और संतुलन की बात की, जो गीता का मूल संदेश है। इसके अलावा किसानों की समस्याओं पर सवाल आया तो उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर जवाब दिया, क्योंकि वे खुद कृषि विभाग में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लागत और लाभ के बीच संतुलन की है। वहीं जब उनसे डिजिटल दुनिया और AI के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे अवसर और चुनौती दोनों के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि AI से काम आसान हो सकता है, लेकिन इसका सही उपयोग जरूरी है, नहीं तो यह समस्याएं भी पैदा कर सकता है। इस तरह हर सवाल में उन्होंने संतुलन बनाए रखा। छोटी चूक भी हुई, लेकिन आत्मविश्वास नहीं टूटा इंटरव्यू में एक-दो ऐसे सवाल भी आए, जहां वे पूरी तरह सही जवाब नहीं दे पाए। जैसे संविधान सभा के पहले अध्यक्ष का नाम उन्हें पता था, लेकिन उस समय याद नहीं आ पाया। लेकिन उन्होंने इस चूक को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने बाकी सवालों में अपना आत्मविश्वास बनाए रखा और वहीं से इंटरव्यू को संभाल लिया। किसान परिवार से निकलकर बनाई पहचान विनोद चौधरी एक किसान परिवार से निकलकर अपनी पहचान बनाने की कहानी है। उनका जन्म चित्तौड़गढ़ जिले की बस्सी तहसील के सादी गांव में हुआ। उनके पिता सीताराम चौधरी किसान हैं और माता काली बाई हाउस वाइफ हैं। साधारण परिवार में पले-बढ़े विनोद ने बचपन से ही मेहनत को अपनी आदत बना लिया था। गांव के माहौल में रहकर उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की और वहीं से आगे बढ़ने का सपना देखा। गांव से स्कूल, स्कूल से कॉलेज और फिर आगे का सफर उन्होंने 9वीं तक की पढ़ाई गांव में ही की। इसके बाद 10वीं से 12वीं तक की पढ़ाई सेंती के सरकारी स्कूल में पूरी की। इसके बाद उन्होंने उदयपुर के कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग में दाखिला लिया और कृषि अभियांत्रिकी में बीटेक किया। नौकरी के साथ तैयारी, लगातार मेहनत पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक में कृषि अधिकारी के रूप में काम किया। उनकी पहली पोस्टिंग हिमाचल प्रदेश के मंडी में थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश के कृषि विभाग में प्रविधिक अधिकारी के पद पर काम शुरू किया। नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई करना आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने इसे जारी रखा। पहले प्रयास में संतोष नहीं, दूसरे में बड़ा परिणाम विनोद ने पहले भी RAS परीक्षा पास की थी, लेकिन उनकी रैंक 569 आई थी। यह उनकी पसंद का रैंक नहीं था इसलिए उन्होंने दुबारा परीक्षा दी। इस बार उन्होंने अपनी गलतियों को समझा, खासकर इंटरव्यू की तैयारी पर ज्यादा ध्यान दिया, और उसका नतीजा सबके सामने है- 54वीं रैंक। कई परीक्षाओं में सफलता, फिर भी लक्ष्य पर फोकस विनोद का चयन कई अन्य परीक्षाओं में भी हुआ। वे SI परीक्षा में चयनित हुए, लेकिन पोस्टिंग नहीं मिली, ACF के इंटरव्यू तक पहुंचे, दो बार JE में चयन हुआ और मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक में भी उनका चयन हुआ। लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। परिवार का साथ बना ताकत विनोद की सफलता में उनके परिवार का भी बड़ा योगदान रहा। उनकी बड़ी बहन ममता चौधरी शिक्षक हैं और छोटी बहन दिव्या सिविल सेवा की तैयारी कर रही हैं।