राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में फर्जीवाड़ा मामले में SOG ने सीकर के SK हॉस्पिटल के पूर्व अधीक्षक डॉ. कमल कुमार अग्रवाल और निजी लैब संचालक डॉ. बनवारी लाल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद एसओजी की ओर से आरोपियों से पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। डीआईजी एसओजी पारिस देशमुख ने बताया- एसओजी जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए। एक मामले में मरीज की MRI 4 दिसंबर 2023 को की गई थी, लेकिन 5 दिसंबर दिखाकर भुगतान लिया गया। जबकि मरीज उस दिन सीकर आया ही नहीं था। वहीं एक अन्य मामले में मरीज किसी अन्य अस्पताल में भर्ती था। फिर भी उसके नाम से फर्जी जांच क्लेम किया गया। प्राइवेट डॉक्टर के रेफरल को सरकारी डॉक्टर के नाम से दिखाकर क्लेम उठाया गया। कई मामलों में मरीजों की जानकारी के बिना ही उनके नाम पर फर्जी क्लेम लिए गए। एसओजी ने संकेत दिए कि घोटाले में अन्य डॉक्टरों और लैब कर्मचारियों की संलिप्तता की भी जांच जारी है। इस धोखाधड़ी से राज्य सरकार को करोड़ों रुपए की हानि हुई। साथ ही वास्तविक मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाएं प्रभावित हुई हैं और योजना की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। अन्य डॉक्टरों और लैब कर्मचारियों की संलिप्तता की भी जांच जारी एसओजी घोटाले में अन्य डॉक्टरों और लैब कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच कर रही है। वहीं दोषी पाए जाने पर सभी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब RGHS के बकाया भुगतान को लेकर चिकित्सा क्षेत्र में असंतोष है, जिससे योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। RGHS के 2200 करोड़ रुपए बकाया बता दें कि राजस्थान में RGHS के करीब 2200 करोड़ रुपए के बकाया भुगतान को लेकर अस्पतालों, डॉक्टरों और फार्मेसी संचालकों में विरोध चल रहा है। वहीं दूसरी ओर इसी योजना में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने डॉक्टरों और लैब संचालकों की मिलीभगत से किए जा रहे करोड़ों रुपए के घोटाले का खुलासा किया। एसओजी की सीकर स्थित बी. लाल लैब के संचालक डॉ. बनवारी लाल उर्फ बी. लाल और सरकारी हॉस्पिटल एस.के. हॉस्पिटल सीकर में पोस्टेड डॉ कमल कुमार अग्रवाल (एमएस ऑर्थो एसोसिएट प्रोफेसर) को गिरफ्तार किया है। ऐसे किया जा रहा था फर्जीवाड़ा जांच में सामने आया कि आरोपी RGHS योजना का दुरुपयोग कर रहे थे- अनियमितता करने पर 7 डॉक्टरों को किया था निलंबित एसओजी के डीआईजी पारिस देशमुख बोले- इससे पहले राजस्थान स्वास्थ्य विभाग RGHS योजनाओं में गड़बड़ी मामले में अपने स्तर पर बड़ी कार्रवाई कर चुका है। राजस्थान सरकार ने अनियमितता करने पर 7 डॉक्टरों को निलंबित कर दिया था। मेडिकल कॉलेज सीकर में कार्यरत अस्थि रोग विभाग के सह आचार्य डॉ. कमल कुमार अग्रवाल, डॉ. सुनील कुमार ढाका, जनरल मेडिसिन विभाग के सह आचार्य डॉ. मुकेश वर्मा, सीएचसी किरवा के डॉ. राकेश कुमार, एसके अस्पताल के डॉ. गजराज सिंह, डॉ. एसएस राठौड़ और डॉ. सुनील शर्मा को निलंबित किया गया। इसी प्रकार योजना में अनियमितता कर अनुचित लाभ लेने पर भरतपुर के भरतपुर नर्सिंग होम और बीकानेर के बोथरा डायग्नोस्टिक एंड इमेजिंग सेंटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखा गया है। मरीज की आवश्यकता से अधिक लिखी जांचें एसओजी के डीआईजी पारिस देशमुख ने कहा- डॉ. बोथरा डायग्नोस्टिक एंड इमेजिंग सेंटर बीकानेर द्वारा प्रस्तुत क्लेमों की जांच में पाया गया कि कई मरीजों की आवश्यकता से अधिक जांचें लिखी गईं। वहीं परीक्षण रिपोर्टों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच में यह सामने आया कि कुछ मरीजों के लिए HbA1c, RA Factor, Procalcitonin जैसे परीक्षण दर्शाए गए, जबकि रिकॉर्ड में आवश्यक चिकित्सीय औचित्य स्पष्ट नहीं था। इसके अलावा कुछ मामलों में T2DM के लिए दर्शाए गए HbA1c टेस्ट की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं पाई गई तथा ओपीडी स्लिप पर भी संबंधित परामर्श का उल्लेख नहीं मिला। अस्पताल में डॉक्टर नहीं, फिर भी उनके नाम से लिखी पर्चियां पीबीएम राजकीय चिकित्सालय बीकानेर के वरिष्ठ चिकित्सकों से दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। संबंधित चिकित्सकों के बयानों में यह तथ्य सामने आया कि जिन पर्चियों पर उनके नाम और सील दर्शाए गए हैं। उनमें से कई पर हस्ताक्षर और लेखन उनके द्वारा किया जाना स्वीकार नहीं किया गया। कुछ चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि संबंधित अवधि में वे अवकाश पर थे। या उस दिन ओपीडी में कार्यरत नहीं थे। फिर भी उनके नाम से पर्चियां एवं जांचें दर्शाई गईं। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ पर्चियों पर दर्शाए गए चिकित्सक उस समय पीबीएम अस्पताल में पदस्थापित ही नहीं थे या उनका रजिस्ट्रेशन बाद की डेट का था। 19 एफआईआर दर्ज, करीब 500 कार्ड ब्लॉक किए RGHS योजना में अनियमितताएं करने वाले अस्पतालों, फार्मेसी एवं लाभार्थियों पर पहले भी सख्त कार्रवाई की गई है। योजना में गड़बड़ी पर अस्पताल एवं फार्मेसी के खिलाफ 19 एफआईआर दर्ज करवाई है। अनियमितता पर 7 चिकित्सकों सहित 64 कार्मिकों को निलंबित किया गया है। वहीं करीब 500 कार्ड ब्लॉक किए गए हैं। कार्ड के दुरुपयोग पर लाभार्थियों से करीब 2 करोड़ की राशि वसूल की गई है। इसी प्रकार 33 अस्पतालों का टीएमएस और 39 अस्पतालों का भुगतान ब्लॉक किया गया है। साथ ही 8 अस्पताल डी—एम्पेनल किए गए हैं। इन अस्पतालों से 32 करोड़ से अधिक की राशि वसूल की गई है। इसी प्रकार 212 फार्मेसी का टीएमएस ब्लॉक किया गया और इनसे 5 करोड़ से अधिक की राशि वसूल की गई।