सांचौर के बहुचर्चित जालम सिंह हत्याकांड में आरोपी चनणाराम विश्नोई को राजस्थान हाईकोर्ट से लगातार दूसरी बार भी जमानत नहीं मिली है। सोमवार को जोधपुर हाईकोर्ट में चनणाराम की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। बचाव पक्ष ने झूठा फंसाने का लगाया आरोप बचाव पक्ष ने बहस के दौरान कहा कि आरोपी को दुश्मनी के चलते झूठा फंसाया गया है। उन्होंने दलील दी कि मृतक के शरीर पर 40 साधारण चोटें, नील के निशान और खरोंचें थीं, लेकिन कोई भी चोट गंभीर नहीं थी। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी अगस्त 2024 से जेल में बंद है। बचाव पक्ष ने 108 एम्बुलेंस ड्राइवर नरपत के बदले गए बयानों का भी हवाला दिया और कहा कि उसने चनणाराम और अन्य आरोपियों द्वारा हत्या का समर्थन नहीं किया है। इसी आधार पर जमानत की मांग की गई। पीड़ित पक्ष ने बताया नृशंस हत्या का मामला पीड़ित पक्ष के एडवोकेट निखिल भंडारी ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि चनणाराम विश्नोई ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर जालम सिंह की नृशंस हत्या की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले घर आकर धमकी दी गई थी और बाद में अपहरण कर हत्या को अंजाम दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि नरपत से पहले ही 4 गवाहों के बयान आरोपी के खिलाफ दर्ज हो चुके हैं, जबकि अभी 22 गवाहों के बयान और बाकी हैं। ऐसे में जमानत नहीं दी जानी चाहिए। 15 लाख की फिरौती और अपहरण के बाद हत्या का आरोप मामले के अनुसार 17 अगस्त 2024 को जालम सिंह का अपहरण कर लिया गया था। आरोप है कि पिता अनोप सिंह से 15 लाख रुपए की फिरौती मांगी गई थी और पैसे नहीं देने पर हत्या की धमकी दी गई थी। आरोप है कि रातभर उसके साथ मारपीट की गई और बाद में उसकी हत्या कर दी गई।