विश्व हिंदू परिषद की महिला इकाई दुर्गा वाहिनी मातृशक्ति ने सिरोही जिले में एक पथ संचलन निकाला। यह कार्यक्रम अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष के तहत खंडेलवाल छात्रावास से शुरू हुआ, जिसमें 600 से ज्यादा महिलाएं और युवतियां शामिल हुईं। संचलन से पहले हुए कार्यक्रम में साध्वी गोविंदगिरी महाराज, पुष्कर कुंवर देवल (अध्यक्ष), गीता मिस्त्री (अतिथि), प्रकाश कुंवर (वक्ता), आनंद कुमार (विहिप राजस्थान क्षेत्र संगठन मंत्री), हीरालाल चौधरी (विहिप जिला अध्यक्ष) और महेंद्र सिंह राजपुरोहित (प्रांत सह मंत्री) जैसे पदाधिकारी मौजूद थे। संचालन दुर्गावाहिनी विभाग संयोजिका पिंकी राजपुरोहित ने किया। 'नारी है समाज की प्रेरणा और राष्ट्र की शक्ति' क्षेत्रीय संगठन मंत्री आनंद कुमार ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह पथ संचलन नारी शक्ति के जागरण, अनुशासन, संगठन, आत्मविश्वास और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में नारी सिर्फ परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि समाज की प्रेरणा और राष्ट्र की शक्ति भी है। 'मातृभूमि की रक्षा में नारी किसी से पीछे नहीं' मुख्य अतिथि प्रकाश कुंवर जोधपुर प्रांत सत्संग प्रमुख ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई ने अपने साहस से यह सिद्ध किया कि मातृभूमि की रक्षा में नारी किसी से पीछे नहीं है। मां पन्नाधाय ने अपने अद्वितीय त्याग से कर्तव्य और समर्पण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। माता अहिल्याबाई होल्कर ने सेवा, न्याय, धर्म और सुशासन के माध्यम से समाज को नई दिशा दी। ये वीरांगनाएं हमें संदेश देती हैं कि नारी केवल शक्ति की उपासक नहीं, स्वयं शक्ति का स्वरूप है। आज आवश्यकता है कि हमारी बेटियां इन महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लें और शिक्षा, संस्कार, सेवा, आत्मनिर्भरता तथा नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ें। 'बेटियों में आत्मरक्षा, जागरूकता, आत्मविश्वास जरूरी' विभाग संयोजिका पिंकी राजपुरोहित ने कहा कि दुर्गा वाहिनी का संदेश स्पष्ट है नारी शिक्षित हो, संस्कारित हो, संगठित हो, आत्मनिर्भर हो और अपनी सुरक्षा के प्रति सजग हो। आज के समय में बेटियों को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ आत्मरक्षा का प्रशिक्षण, डिजिटल सुरक्षा की जानकारी, कानून के प्रति जागरूकता और कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी जरूरी है। पथ संचलन में एक जैसी वेशभूषा, अनुशासित कदमताल और चेहरों पर आत्मविश्वास आमजन को यही संदेश दे रहे हैं कि मातृशक्ति जागरूक है, संगठित है और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझती है। पथ संचलन घोष की ताल के साथ कदम ताल करते हुए खंडेलवाल छात्रावास से जेल चौराहा, सरजावाव दरवाजा, नया बस स्टैंड, संपूर्णानंद कॉलोनी, भाटकड़ा रामझरोखा, आयुर्वेदिक हॉस्पिटल, कुम्हारवाड़ा श्रीयादे मन्दिर, भागीरथ मंदिर, सरजावाव दरवाजा के बाहर होते हुए पुनः खंडेलवाल छात्रावास में संपन हुआ।