सिरोही जिले में नेशनल हाईवे निर्माण के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के खिलाफ गोयली, रामपुरा समेत आसपास के गांवों के किसान एकजुट हो गए हैं। गोयली के खेतलाजी मंदिर में आयोजित महापंचायत में सैकड़ों ग्रामीणों ने उपजाऊ कृषि भूमि और 40 से 50 पुश्तैनी कृषि कुओं को बचाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी आपत्तियों को अनदेखा कर जबरन जमीन अधिग्रहित की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। महापंचायत में किसानों का शक्ति प्रदर्शन गोयली स्थित प्रसिद्ध खेतलाजी मंदिर प्रांगण में आयोजित महापंचायत में सैकड़ों किसानों और ग्रामीणों ने भाग लिया। बैठक में सरकार के भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव का विरोध करते हुए आर-पार की लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया गया। पुश्तैनी कुएं और खेती पर संकट महापंचायत में किसानों ने बताया कि प्रस्तावित नेशनल हाईवे के मार्ग में करीब 40 से 50 पुराने कृषि कुएं आ रहे हैं। इन कुओं से सिंचित उपजाऊ भूमि पर हजारों परिवारों की आजीविका निर्भर है। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से उनकी खेती और वर्षों पुरानी सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होगी। 'विकास चाहिए, लेकिन किसानों की कीमत पर नहीं' ग्रामीणों ने कहा कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों को उजाड़कर बनने वाला हाईवे स्वीकार नहीं होगा। उनका कहना है कि जबरन भूमि अधिग्रहण से हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा और कई सीमांत किसान भूमिहीन हो जाएंगे। लिखित आपत्तियां देने का निर्णय महापंचायत में सर्वसम्मति से तय किया गया कि सभी प्रभावित ग्रामीण प्रशासन के समक्ष भूमि अधिग्रहण के खिलाफ लिखित आपत्तियां दर्ज कराएंगे। इसके लिए सामूहिक रूप से कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जबरन अधिग्रहण हुआ तो उग्र आंदोलन की चेतावनी ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी वैध आपत्तियों की अनदेखी कर जबरन जमीन अधिग्रहित करने का प्रयास किया गया तो क्षेत्र में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में कानून-व्यवस्था बिगड़ने या किसी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी प्रशासन और राज्य सरकार की होगी।