सिरोही जिले में खनन परियोजना का विरोध अब राजनीतिक विवाद का रूप ले रहा है। पिंडवाड़ा क्षेत्र की चार ग्राम पंचायतों के 12 गांवों के ग्रामीणों को पुलिस की ओर से पाबंदी नोटिस दिए जाने के बाद नाराजगी बढ़ गई है। ये नोटिस मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की खनन परियोजना के विरोध के दौरान दिए गए। वाटेरा और भारजा के ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपनी जमीन और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे, लेकिन उन्हें पाबंदी नोटिस थमा दिए गए। ग्रामीणों ने इसके लिए भाजपा सरकार और स्थानीय नेताओं को जिम्मेदार ठहराते हुए सिरोही के मतदाताओं से भाजपा के खिलाफ वोट करने की अपील की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। चार पंचायतों के 12 गांवों में नाराजगी ग्रामीणों के अनुसार, खनन परियोजना को लेकर क्षेत्र में विरोध जारी है। इसी बीच चार ग्राम पंचायतों के 12 गांवों के लोगों को पुलिस की ओर से पाबंदी नोटिस दिए गए। वाटेरा और भारजा के ग्रामीणों का कहना है कि उनका विरोध अपनी जमीन और पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना शांति व्यवस्था के लिए खतरा कैसे हो सकता है। ग्रामीणों ने सरकार के रवैये पर उठाए सवाल पाबंदी नोटिस मिलने के बाद ग्रामीणों ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार और स्थानीय नेताओं के कहने पर उन्हें नोटिस दिए गए हैं। ग्रामीणों ने इसे अपनी आवाज दबाने की कोशिश बताते हुए सरकार के रवैये को तानाशाही करार दिया। हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मतदाताओं से भाजपा के खिलाफ वोट करने की अपील खनन परियोजना को लेकर चल रहे विरोध के बीच ग्रामीणों ने राजनीतिक रुख भी अपनाया है। प्रभावित गांवों के लोगों ने सिरोही के मतदाताओं से भाजपा के खिलाफ मतदान करने की अपील की। उनका कहना है कि जमीन और पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विरोध करने वालों की बात सुनी जानी चाहिए। पाबंदी नोटिस के बाद यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। बोले- दबाव में नहीं झुकेंगे, कानूनी लड़ाई जारी रहेगी ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे पाबंदी नोटिस और दबाव के बावजूद अपने विरोध से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि जमीन और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कानूनी तरीके से संघर्ष जारी रखा जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपने पक्ष को सुनने और खनन परियोजना से जुड़े मुद्दों पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।