नगर निगम क्षेत्र में घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। ऑटो टिपर टैक्सियों और कचरा उठाने वाले ट्रैक्टरों के संचालन में बरती जा रही गंभीर लापरवाहियों से नाराज पार्षदों का गुस्सा शुक्रवार को आखिरकार फूट पड़ा। पिछले दो महीनों से व्यवस्थाओं में सुधार न होने और निगम अधिकारियों की उदासीनता से आक्रोशित पार्षदों ने शुक्रवार सुबह डंपिंग यार्ड पर पहुंचकर टेंट लगाया और धरना शुरू कर दिया। शुक्रवार सुबह लगभग छह बजे पार्षद चेतना डोटासरा और सुरेंद्र डोटासरा सबसे पहले डंपिंग यार्ड पहुंचे। इसके कुछ ही देर बाद सुभाष स्वामी, जावेद खान, बाबा पारस मारू, अश्विनी मिढ्ढा, छैल सिंह, पवन कुमार, गोवर्धन डूडी, मदन सियाग, कमल साध, मनीष सिंघल, दुर्गादास चंगानी, काल महाराज, रवि जनागल, जितेंद्र सिंह भाटी, सलमान खान और धर्मवीर नाहटा सहित कई अन्य पार्षद एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौके पर एकत्र हो गए। पार्षदों ने दो टूक मांग रखी कि निगम के सभी 80 वार्डों में प्रतिदिन तय संख्या में ऑटो टिपर और ट्रैक्टर भेजे जाएं। साथ ही, इसकी वार्डवार सूची उपलब्ध कराई जाए ताकि जमीनी स्तर पर वास्तविक संचालन का भौतिक सत्यापन किया जा सके। बदबू के कारण धरने से हटे कांग्रेसी डंपिंग यार्ड पर लंबे समय तक चले इस प्रदर्शन के दौरान एक रोचक और असहज स्थिति भी पैदा हुई। डंपिंग यार्ड के आसपास फैली अत्यधिक दुर्गंध और अस्वास्थ्यकर वातावरण के कारण कुछ ही देर में पार्षदों का वहां बैठना मुश्किल हो गया। हवा का रुख बदलते ही तेज बदबू से पार्षदों को उल्टियां जैसी समस्याएं होने लगीं, जिसके चलते मजबूरी में वहां से धरना हटाना पड़ा। पार्षदों ने इस आंदोलन को तुरंत नगर निगम परिसर में शिफ्ट करने की सोची, लेकिन शनिवार और रविवार को अवकाश होने के कारण अब इस आंदोलन को सोमवार से नगर निगम कार्यालय में व्यापक रूप से शुरू करने की चेतावनी दी है। पार्षदों ने दो टूक कहा है कि यदि जल्द ही सफाई व्यवस्था को पटरी पर नहीं लाया गया, तो नगर निगम प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा। दोपहर तीन बजे तक महज 50 प्रतिशत वाहन हुए रवाना : निगम के हेल्थ ऑफिसर सुबह करीब साढ़े छह बजे से ही मौके पर मौजूद थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दोपहर एक बजे नगर निगम के सभी जोन के सेनेटरी इंस्पेक्टर भी डंपिंग यार्ड पहुंचे और उन्होंने संसाधनों का जायजा लिया। इसके बावजूद लचर व्यवस्था का आलम यह रहा कि दोपहर तीन बजे तक बमुश्किल 50 प्रतिशत टैक्सियां और ट्रैक्टर ही कचरा उठाने के लिए रवाना हो पाए थे। इस दौरान ठेकेदार के नुमाइंदों ने प्रदर्शनकारी पार्षदों के वार्डों में प्राथमिकता के आधार पर वाहन भेजने का प्रस्ताव रखा, जिस पर पार्षदों ने कड़ी आपत्ति जताई। पार्षदों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम यहां केवल अपने निजी वार्डों के लिए नहीं, बल्कि पूरे बीकानेर के 80 वार्डों की आम जनता के हक के लिए बैठे हैं। वाहनों के रजिस्ट्रेशन और चालकों के लाइसेंस पर भी उठाए सवाल : धरने के दौरान पार्षदों ने कचरा परिवहन में लगे वाहनों की तकनीकी और कानूनी स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। पार्षदों ने आरोप लगाया कि कई वाहनों पर रजिस्ट्रेशन नंबर तक प्रदर्शित नहीं हैं। इसके अलावा, वाहनों को चलाने वाले चालकों के वैध ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य अनिवार्य दस्तावेजों को लेकर भी भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। पार्षदों ने सभी वाहनों के पंजीयन, ड्राइवरों के लाइसेंस, कार्यरत कर्मचारियों की संख्या की जांच कराने की मांग की।