सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तानी जासूस झबरा राम की जमानत को रद्द कर दिया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने आरोपी को दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट या फिर जांच एजेंसी के समक्ष सरेंडर करने का आदेश दिया है। ऐसा नहीं करने पर राज्य सरकार उसे हिरासत में लेने के लिए कार्रवाई कर सकेगी। झबरा राम पर खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने और सेना से जुड़ी गोपनीय जानकारी सीमा पार अपने हैंडलर्स को देने के आरोप हैं। झबरा राम को राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत दी थी। जिसे रद्द कराने के लिए जांच एजेंसी सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। हाई कोर्ट ने अपराध की गंभीरता पर ध्यान नहीं दिया सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने कथित प्रक्रियागत अनियमितता को जमानत देने का पर्याप्त आधार मान लिया, जबकि अपराधों की गंभीरता और जांच में जुटाए गए सबूतों पर उचित ध्यान नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई को हाईकोर्ट की ओर से दी गई जमानत रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। अदालत की टिप्पणियां केवल जमानत रद्द करने की कार्रवाई तक सीमित हैं और इनका ट्रायल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। जनवरी में हुई थी गिरफ्तारी झबरा राम को राजस्थान CID इंटेलिजेंस ने 30 जनवरी को जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र गिरफ्तार किया था। उस पर ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आरोप हैं। --------- ये खबर भी पढ़िए… पाकिस्तानी जासूस को कोर्ट ने जेल भेजा:कोचिंग जाते हुए सेना के मूवमेंट की फोटो खिंचता था, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी जासूसी की पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार झबरा राम की पांच दिन की रिमांड अवधि पूरी होने पर बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। (पढ़िए पूरी खबर)