चामुंडा माता का अवतार है तुरत-फुरत माता गुणावती गांव स्थित तुरत-फुरत माता मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 1773 में मिगसर सुदी 5, गुरुवार को करवाया गया था। तुरत-फुरत माताजी को चामुंडा माता का अवतार माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार जोधपुर के महाराजा अजीत सिंह राठौड़ और कुंवर अभयसिंह राठौड़ द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर राजपूताना शैली में बना है। भास्कर न्यूज । नागौर नवरात्र में देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मकराना के निकट गुणावती गांव में संगमरमर की पहाड़ी पर स्थित तुरत-फुरत माता मंदिर भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां माता के दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर के शिलालेख के अनुसार इसका निर्माण 310 साल पहले हुआ था। स्थानीय मान्यता है कि माता के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद तुरंत पूरी होती है। इसी विश्वास के चलते माता को तुरत-फुरत या तुरफरी माता के नाम से जाना जाता है। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि माता तुरंत पर्चा देकर उनके कष्ट दूर करती हैं और मनोकामनाएं पूरी करती हैं। मान्यता यह भी है कि गांव में किसी आपदा, डाकुओं के खतरे या अनहोनी की आशंका होने पर माता आज भी आवाज लगाकर लोगों को सचेत करती हैं। इसी तरह की धार्मिक मान्यताओं और चमत्कारों के चलते यह मंदिर दूर-दराज के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नवरात्र में भक्त दर्शन यहां आते हैं । नागौर. मकराना में पहाड़ी पर स्थित है तुरत-फुरत माता का मंदिर।