केंद्रीय मंत्री से लेकर प्रदेश अध्यक्ष, सांसद, विधायक संभालेंगे मोर्चा निकायों के बाद अब भाजपा गांवों में कमल खिलाने की तैयारी में जुटी है। पंचायती राज चुनाव में जिला प्रमुख और प्रधान बनाने का जिम्मा पार्टी ने अपने दिग्गज और स्थानीय नेताओं को सौंपा है। पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष, चार केंद्रीय मंत्रियों और राज्य सरकार के 23 मंत्रियों के साथ ही 14 सांसदों और 118 विधायकों को अपने प्रभाव वाले इलाकों में सियासी समीकरण साधने का टास्क दिया है। भाजपा की रणनीति में इस बार स्थानीय पकड़ रखने वाले वरिष्ठ नेताओं की बड़ी भूमिका रहेगी। पार्टी चाहती है कि स्थानीय राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले नेता अपने क्षेत्रों में संगठन को सक्रिय करें और पंचायतों में पार्टी के पक्ष में माहौल बनाएं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बैठकों में भी नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रमुख-प्रधान के चुनाव में समर्थन हासिल करना चुनौती जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव में निर्वाचित सदस्यों का समर्थन हासिल करना बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में स्थानीय नेताओं को कार्यकर्ताओं की सक्रियता, गुटबाजी और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच तालमेल बनाना होगा। अब भाजपा के इन दिग्गजों के सामने अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी को मजबूती दिलाने की चुनौती होगी। गांवों की राजनीति में स्थानीय संपर्क और पुराने सियासी रिश्ते भी असर डालते हैं। यहां बड़े नेताओं की सभाओं के साथ-साथ बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय मुद्दों की समझ जरूरी होती है। वरिष्ठ नेताओं पर संभाग और गृह जिले की दोहरी जिम्मेदारी पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं को संभाग प्रभारी के तौर पर भी लगाया हुआ है। अब उन्हीं नेताओं को गृह जिलों में जिला प्रमुख व प्रधान बनाने की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी भी दी गई है। इसके लिए जातीय व क्षेत्रीय समीकरणों पर काम करना होगा। जयपुर में मंत्री राज्यवर्धन-पूनिया और राव राजेंद्र सिंह को कमान, पाली प्रदेश अध्यक्ष संभालेंगे भाजपा ने अलग-अलग जिलों में स्थानीय राजनीति में पकड़ रखने वाले नेताओं पर भरोसा जताया है। पाली में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ खुद जिम्मेदारी संभालेंगे। जयपुर जिले में जिला प्रमुख व प्रधान बनाने की वरिष्ठ नेता राज्य सभा सांसद सतीश पूनिया, उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ व सांसद राव राजेंद्र सिंह पर जिम्मेदारी रहेगी। बाड़मेर में राज्य मंत्री केके विश्नोई, अलवर में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और जोधपुर में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की भूमिका अहम रहेगी। करौली में डॉ. किरोड़ीलाल मीणा और भरतपुर में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम को जिम्मेदारी दी गई है। बीकानेर में केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के साथ देवीसिंह भाटी और सुमित गोदारा की भूमिका रहेगी। झुंझुनूं में पूर्व सांसद नरेंद्र और संतोष अहलावत, जबकि चूरू में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ पर दारोमदार रहेगा। हालांकि राजेंद्र राठौड़ फिलहाल अस्वस्थ हैं। पार्टी की ओर से सवाईमाधोपुर में डॉ. किरोड़ीलाल मीणा और जितेंद्र गोठवाल, सीकर में प्रेम सिंह बाजोर तथा दौसा में विधायक विक्रम बंशीवाल जिम्मेदारी संभालेंगे। अजमेर में केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी, मंत्री सुरेश रावत और भंवर सिंह पलाड़ा की भूमिका रहेगी। चित्तौड़गढ़ में सांसद सीपी जोशी और श्रीचंद कृपलानी, जबकि भीलवाड़ा में सांसद दामोदर अग्रवाल को जिम्मेदारी दी गई है। कोटा-बूंदी में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, झालावाड़-बारां में सांसद दुष्यंत सिंह और टोंक में जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी की बड़ी भूमिका रहेगी।