दान में मिले खून के कंपोनेट निकालकर धंधा करने के आरोपों से घिरे पुरोहित ब्लड सेंटर पर शिकंजा कसता जा रहा है। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य सरकार को इस मामले की विस्तृत बिंदुवार जांच करवाने के निर्देश दिए हैं। नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एनबीटीसी) के सहायक निदेशक डॉ. मानस प्रतिम रॉय ने राजस्थान स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एसबीटीसी) को 13 अक्टूबर को पत्र भेजकर निर्देश दिए हैं। इसमें गोशाला रोड पर पुरोहित ब्लड सेंटर को बीते 5 वर्षों में दान में मिले खून की प्रत्येक यूनिट के दानदाता का वेरिफिकेशन, इस यूनिट से आगे बनाए गए कंपोनेट्स का उपयोग कहां और किस संस्था को करवाया गया, इसकी विस्तार से जांच करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि पुरोहित ब्लड सेंटर पर 30 जून को हुई औचक जांच में मिली इसी तरह की गंभीर प्रकृति की लापरवाही की रिपोर्ट स्टेट ड्रग कंट्रोलर को भी 12 जुलाई को भिजवाई जा चुकी है। इसके संदर्भ में ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने 5 अक्टूबर को पुरोहित ब्लड सेंटर संचालक विष्णु पुरोहित को नोटिस भेजकर बिंदुवार जवाब मांगा हुआ है। एनबीटीसी के सहायक निदेशक ने मामला काफी गंभीर प्रकृति की लापरवाही और ब्लड तथा कंपोनेट के दुरुपयोग से जुड़ा होने का संदेह जताया है। इसमें उन्होंने एसबीटीएस को जांच शूरू करने से पहले तत्काल पुरोहित ब्लड सेंटर का बीते पांच वर्षों का सारा रिकॉर्ड सुरक्षित करवाने के निर्देश दिए हैं ताकि रिकॉर्ड को खुर्दबुर्द या मेन्युप्लेट न किया जा सके। इसमें संबंधित मूल रजिस्टर, कम्प्यूटर रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, कंपोनेंट रिकॉर्ड, डिस्पैच रिकॉर्ड और रुपयों के भुगतान के दस्तावेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में पुरानी आबादी निवासी राजेश अग्रवाल ने 27 सितंबर को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को पुरोहित ब्लड सेंटर की ओर से किए जा रहे ब्लड के गोरख धंधे से अवगत करवाया था। रोहित ब्लड सेंटर में बीते पांच वर्षों के रिकॉर्ड की जांच होगी। इसमें स्वैच्छिक रक्तदान से प्राप्त होल ब्लड से कितनी मात्रा में प्लाज्मा तैयार हुआ, उसका कितना इस्तेमाल सेंटर में किया गया और कितना अन्य संस्थाओं या निजी कंपनियों को उपलब्ध कराया गया। इसके साथ ही प्लाज्मा भेजे जाने की स्थिति में संबंधित संस्था का नाम, उद्देश्य, लाइसेंस, अनुमति और आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) की जांच होगी। बैच/लॉट, स्टॉक, डिस्पैच और प्राप्ति रिकॉर्ड का मिलान होगा तथा ब्लड कंपोनेट अन्य संस्था को दिए जाने पर उसके बदले में क्या और कितना आर्थिक भुगतान हुआ अथवा अन्य वस्तु दी गई, उससे जुड़े समझौते, बिल, चालान और नकदी लेनदेन के दस्तावेजों की जांच की जाएगी। नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। सहायक निदेशक डॉ. मानस प्रतिम रॉय ने स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल को निर्देश दिए हैं कि वे पुरोहित ब्लड सेंटर पर की गई जांच, जांच में सामने आई स्थिति तथा स्थिति की गंभीरता के अनुसार की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट बनाकर उनको भिजवाएंगे। इतना ही नहीं यह पूरी रिपोर्ट शिकायतकर्ता को भी उपलब्ध करवाने को कहा है। उल्लेखनीय है कि 30 जून को सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन नॉर्थ जोन गाजियाबाद से डीआई कालीचरण व डीआई सुखदीप कौर ने यहां औचक निरीक्षण किया। इसमें जनवरी से जून 2026 तक 1119 यूनिट एफएफपी (फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा) यानी करीब 279.75 लीटर प्लाज्मा तैयार करने के साक्ष्य मिले। इसे किनको जारी किया, किन डोनरों से खून लिया, इसको लेकर कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला। ब्लड समिति वर्ष 2024 व 2025 में दान लिए गए ब्लड के यूनिट तो बताए लेकिन किससे लिए और आगे किसे दिए, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं दिखा पाई।