चूरू | वार्ड 43 में हनुमान धोरा स्थित बालाजी मंदिर में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को कथावाचक आचार्य हरिओम पाराशर ने राजा परीक्षित व सुखदेवजी महाराज के आगमन सहित भगवान के 24 अवतारों की महिमा का वर्णन सुनाया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का मूल उद्देश्य सांसारिक मोह माया से विरक्त होकर भगवान की भक्ति में लीन होना है। भागवत भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है और इसमें जो व्यक्ति मन से जुड़ता है, उस व्यक्ति को सांसारिक मोह माया प्रभावित नहीं कर सकती। भागवत कथा हमें इस सांसारिक जीवन की सच्चाई से अवगत करवाती है तथा बताती है कि इस सृष्टि में जो भी घटित होता है, वह भगवान की मर्जी से होता है। अगर हम अच्छा कर्म करेंगे, तो हमें अच्छे फल मिलेंगे।