टोंक में 15 अप्रैल से 21 अप्रैल तक आयोजित बाल विवाह प्रतिषेध सप्ताह का समापन समारोह जिला परिषद स्थित सभागार में हुआ। कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, टोंक, जिला प्रशासन, जिला बाल संरक्षण इकाई और एनजीओ सिकोइडिकॉन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश दिनेश कुमार जलुथरिया ने की। अभियान की गतिविधियों की समीक्षा समापन समारोह में सप्ताहभर चली जागरूकता रैलियों, विधिक साक्षरता शिविरों, विद्यालय और समुदाय स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों के साथ विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों की समीक्षा की गई। इस दौरान बाल विवाह रोकथाम को लेकर किए गए कार्यों का मूल्यांकन भी किया गया। बाल कल्याण अधिकारियों को दिए गए निर्देश आयोजित क्षमतावर्धन सत्र में सभी थानों के बाल कल्याण अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बाल विवाह की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई करें, आवश्यक होने पर निषेधाज्ञा प्राप्त करें और स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत बनाएं। कानूनन अपराध, समन्वय जरूरी सचिव दिनेश कुमार जलुथरिया ने कहा कि बाल विवाह सामाजिक कुरीति ही नहीं, बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध है। इसे रोकने के लिए विभागों के बीच त्वरित समन्वय और सशक्त सूचना तंत्र जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि सूचना मिलते ही तत्काल निषेधाज्ञा की कार्रवाई सुनिश्चित कर प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय की जाए। साथ ही विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जागरूकता और निःशुल्क विधिक सहायता के माध्यम से निरंतर प्रयास किए जाने की बात कही। विभागीय अधिकारियों ने रखे सुझाव मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद परशुराम धानका ने ग्राम और पंचायत स्तर पर प्रयासों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। सहायक निदेशक बाल अधिकारिता विभाग नवल खान ने आंगनबाड़ी, विद्यालय और ग्राम स्तर के कार्मिकों को सतर्क रहकर संभावित बाल विवाह की पहचान कर समय पर सूचना देने की बात कही। सहायक निदेशक महिला अधिकारिता विभाग मैरिंगटन सोनी ने बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और सशक्तिकरण पर जोर दिया। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी सुबेह सिंह यादव ने विद्यालय स्तर पर जागरूकता और ड्रॉपआउट पर निगरानी को जरूरी बताया। बाल अधिकार सुरक्षा और सतर्कता पर जोर अध्यक्ष बाल कल्याण समिति हेमराज चौधरी ने त्वरित हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई। मानव तस्करी यूनिट प्रभारी देवेंद्र सिंह ने बाल विवाह और मानव तस्करी के बीच संबंध को रेखांकित करते हुए सतर्कता बढ़ाने की बात कही। तहसीलदार भगवती प्रसाद ने प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई और स्थानीय समन्वय को मजबूत करने की जरूरत बताई। वहीं सिकोइडिकॉन के प्रभारी देवेंद्र जांगिड़ ने जन-जागरूकता और समुदाय की भागीदारी को अहम बताया। कानून और हेल्पलाइन की दी जानकारी कार्यक्रम के अंत में सचिव ने सभी उपस्थितों को बाल विवाह उन्मूलन के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने और इसे अधिकाधिक रोकने की शपथ दिलाई।