टोंक जिला परिषद की 31 सीटों के लिए शुक्रवार को दोपहर 3 बजे तक 115 नामांकन दाखिल हुए। जिला निर्वाचन अधिकारी टीना डाबी को प्रत्याशियों ने अपने नामांकन सौंपे। इस बार जिला प्रमुख का पद अनुसूचित जाति (SC) की महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी के कई बड़े नेताओं के परिवारों की महिलाओं के चुनाव मैदान में उतरने से जिला प्रमुख पद को लेकर मुकाबला रोचक हो गया है। पूर्व डिप्टी CM की बेटी और पूर्व विधायक की पत्नी ने भरा पर्चा कांग्रेस की ओर से पूर्व डिप्टी CM स्वर्गीय बनवारी लाल बैरवा की बेटी अलका बैरवा ने जिला परिषद सदस्य के लिए नामांकन दाखिल किया। अलका बैरवा निवाई की प्रधान रह चुकी हैं। उनके परिवार के अन्य सदस्य भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उनके भतीजे निवाई से विधायक हैं, जबकि उनके भाई मनिंदर सिंह लोदी जिला परिषद सदस्य रह चुके हैं। वहीं, पूर्व विधायक प्रशांत बैरवा की पत्नी सुषमा बैरवा ने भी कांग्रेस की ओर से नामांकन दाखिल किया। प्रशांत बैरवा निवाई से विधायक रह चुके हैं। सुषमा बैरवा के नामांकन के बाद जिला प्रमुख पद को लेकर कांग्रेस के भीतर राजनीतिक समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस के दो राजनीतिक परिवारों के बीच मुकाबले की चर्चा टोंक जिले की कांग्रेस राजनीति में पूर्व डिप्टी CM सचिन पायलट के अलावा पूर्व डिप्टी CM स्वर्गीय बनवारी लाल बैरवा और पूर्व सांसद व विधायक स्वर्गीय द्वारका प्रसाद बैरवा के परिवारों का प्रभाव रहा है। इन परिवारों के बीच राजनीतिक दबदबे को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। बनवारी लाल बैरवा की बेटी अलका बैरवा और पूर्व सांसद द्वारका प्रसाद बैरवा के बेटे प्रशांत बैरवा की पत्नी सुषमा बैरवा के चुनाव मैदान में उतरने से जिला प्रमुख पद को लेकर दोनों परिवारों के बीच संभावित मुकाबले की चर्चा है। हालांकि, जिला प्रमुख का चुनाव इन सदस्यों की जीत और बोर्ड के गठन के बाद ही तय होगा। बड़े नेताओं के परिवारों की महिलाओं ने भी भरा नामांकन बीजेपी की ओर से SC मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और मोर्चा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश चंदेल के छोटे भाई राजेश चंदेल की पत्नी रेखा चंदेल के नाम की भी चर्चा है। बीजेपी महामंत्री प्रभु बाडोलिया की पत्नी बादाम बाडोलिया को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बनी हुई है।दोपहर तक कलेक्ट्रेट और उसके आसपास नामांकन को लेकर हलचल रही। बड़े नेताओं के परिवारों की महिलाओं के चुनाव मैदान में आने से जिला परिषद सदस्य की सीटों के साथ जिला प्रमुख पद के संभावित दावेदारों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पहली बार SC महिला के लिए आरक्षित हुई जिला प्रमुख की सीट इस बार टोंक जिला प्रमुख का पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है। इसी वजह से इस पद को लेकर राजनीतिक दलों में खास दिलचस्पी है। जिला परिषद सदस्य का चुनाव जीतने के बाद ही जिला प्रमुख बनने का रास्ता खुलेगा। ऐसे में सभी दलों के लिए सदस्य सीटों पर जीत अहम होगी। बीजेपी का जिला प्रमुख बनाने का दावा जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बीजेपी पंचायत राज चुनाव भी जीतेगी और जिला प्रमुख बीजेपी का होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विकास के कई काम करवाए हैं और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के विकास कार्यों के आधार पर पार्टी चुनाव जीतेगी। इस दौरान पूर्व मंत्री अनीता भदेल, टोंक के पूर्व विधायक अजीत सिंह मेहता, बीजेपी जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह चौहान, पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया और SC मोर्चा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश चंदेल समेत अन्य नेता मौजूद रहे।