उदयपुर में सेवा भारती चिकित्सालय के प्राकृतिक आरोग्य केंद्र का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस दौरान उन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था पर अपनी बात रखते हुए कहा कि दुनिया के स्वास्थ्य की चिंता केवल एक जगह या एक संस्था के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। उन्होंने स्थानीय स्तर पर मजबूत स्वास्थ्य तंत्र, सामाजिक सहभागिता और सेवा कार्यों की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में सेवा भारती के नए केंद्र के माध्यम से समाज के जरूरतमंद वर्गों तक सेवा गतिविधियों को और व्यापक रूप से पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया गया। इस खास मौके पर डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा और आरएसएस के पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी मौजूद रहे। कार्यक्रम में भैयाजी जोशी ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और वैश्विक संगठनों की कार्यप्रणाली पर खुलकर अपने विचार रखे। एक केंद्र से विश्व की स्वास्थ्य की चिंता करना व्यावहारिक नहीं भैयाजी जोशी ने कहा कि पूरी दुनिया के स्वास्थ्य की चिंता करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जैसी संस्था बनाई गई है। लेकिन सिर्फ एक केंद्र से पूरे विश्व के स्वास्थ्य की चिंता करना व्यावहारिक नहीं है।उन्होंने इसे अवैज्ञानिक और अशास्त्रीय बताया। जोशी ने तर्क दिया कि दुनिया के हर देश और समाज की परंपराएं, मान्यताएं, वहां की जलवायु और खान-पान पूरी तरह अलग हैं, इसलिए स्वास्थ्य को लेकर एक ही नजरिया सब पर लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों को ध्यान में रखकर काम करने वाले संगठनों की जरूरत है। उन्होंने एलोपैथी और अन्य चिकित्सा पद्धतियों के बीच के द्वंद्व पर भी बात की। जोशी ने कहा कि आज के विज्ञान में 'मॉडल मेडिसिन' और 'अल्टरनेटिव मेडिसिन' जैसे शब्दों का प्रयोग होता है। उदयपुर में 22 साल बाद प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र की शुरुआत भैयाजी जोशी ने कहा कि एलोपैथी वाले सोचते हैं कि वे ही प्रमुख हैं और बाकी सब वैकल्पिक हैं। लेकिन भारत के चिंतकों और मनीषियों का मानना है कि हम इसे 'वैकल्पिक' व्यवस्था नहीं, बल्कि 'समानांतर' व्यवस्था कहेंगे। अगर पूरा चिकित्सा जगत इस समानांतर व्यवस्था को स्वीकार कर ले, तो कई तरह के विवाद अपने आप सुलझ जाएंगे। सेवा भारती इसी समग्र विचार के साथ आगे बढ़ रही है और उदयपुर में करीब 22 साल बाद इस प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र की शुरुआत की गई है, जहां आने वाले समय में अन्य चिकित्सा पद्धतियां भी शुरू होंगी। चिकित्सा सुविधाओं में हो गुणात्मक बदलाव उन्होंने देश की चिकित्सा प्रणालियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में इलाज की कई तरह की व्यवस्थाएं मौजूद हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि चिकित्सा सुविधाओं में गुणात्मक बदलाव आना चाहिए और यह सेवाएं आम लोगों की जेब के अनुकूल होनी चाहिए, यानी क्वालिटी और अफोर्डेबिलिटी दोनों जरूरी हैं। भैयाजी जोशी ने कहा कि जब स्वयंसेवी और सामाजिक संस्थाएं इस क्षेत्र में आगे आती हैं, तो उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि समाज का एक बड़ा वर्ग इन पर निर्भर करता है। डॉक्टर्स पर निर्भर रहना स्वास्थ्य के लिए अच्छा संकेत नहीं उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य के प्रति ऐसा अवेयरनेस और माहौल बनना चाहिए कि लोगों को अस्पताल जाने की जरूरत ही न पड़े। केवल डॉक्टरों पर निर्भर रहना किसी भी देश के स्वास्थ्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है। जोशी ने शरीर और मन के स्वास्थ्य के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि शरीर का स्वास्थ्य तो दवाइयों और चिकित्सा पद्धतियों से सुधर सकता है, लेकिन मन के स्वास्थ्य के लिए कोई रेडीमेड दवा नहीं होती। मन के स्वास्थ्य के लिए साधना करने वाले लोगों का मार्गदर्शन जरूरी है। मेंटल हेल्थ नहीं 'मानस के स्वास्थ्य' की हो रही बात उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल मेंटल हेल्थ (मानसिक बीमारी) की नहीं, बल्कि 'मानस के स्वास्थ्य' यानी एक स्वस्थ मन की बात कर रहे हैं। मन के अस्वस्थ होने के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए जीवनशैली में बदलाव, सही खान-पान, संयम और समाज में व्यापक जागरूकता लाने की बहुत बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि अगर प्रामाणिकता के साथ काम किया जाए, तो किसी भी भारतीय को इलाज के लिए देश से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस मौके पर उद्योगपति संजय सिंघल, राहुल अग्रवाल, उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत, शहर विधायक ताराचंद जैन कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे।