उदयपुर शहर के शक्तिनगर में लंबे समय से अटकी बॉटलनेक की समस्या का समाधान हो गया है। प्रभावित 8 परिवारों के साथ नगर निगम की सहमति बनने के बाद शनिवार से सड़क चौड़ी करने का काम शुरू होगा। साथ ही शहर में सफाई व्यवस्था में लापरवाही बरतने और शर्तों के अनुसार गाड़ियां व कर्मचारी नहीं लगाने पर निगम ने सफाई ठेका फर्म 'आपी मल्टी क्लीन सर्विसेज' को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। सुधार नहीं होने पर फर्म को ब्लैकलिस्ट (डिबार) किया जाएगा। शक्तिनगर बॉटलनेक को लेकर शुक्रवार को महापौर पारस सिंघवी के कार्यालय में बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि जिन विस्थापित परिवारों ने अभी तक तय राशि जमा नहीं कराई है। वे अगले सात दिन में पैसा जमा कराएंगे। वहीं जिन दो परिवारों को जमीन के बदले पैसा दिया जाना था, उन्हें नगर निगम ने शुक्रवार को ही चेक सौंप दिए। सभी परिवारों द्वारा राशि जमा कराने के 30 दिन में उन्हें बदले में दी जाने वाली जमीन के आवंटन पत्र और कब्जा पत्र दे दिए जाएंगे। प्रभावित परिवारों ने शुक्रवार को ही अपनी जमीन का कब्जा नगर निगम को सौंप दिया है। जमीन मिलने के बाद निगम वहां से मिट्टी का भराव हटाने, नई सड़क बनाने और नालियों के निर्माण का काम शुरू होगा। आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया- दिवाली से पहले इस सड़क का काम पूरा कर लिया जाएगा, जिससे इस मार्ग पर यातायात सुगम हो सकेगा। समय पर कचरा नहीं उठाने पर सख्ती दूसरी ओर शहर के विभिन्न वार्डों और यूडीए (UDA) क्षेत्रों में सड़क की सफाई से निकलने वाले कचरे को समय पर नहीं उठाने पर नगर निगम ने सख्ती दिखाई है। निगम ने 1 अप्रैल 2026 को 'आपी मल्टी क्लीन सर्विसेज' को सफाई और कचरा उठाने का कार्यादेश दिया था। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि ठेका फर्म तय शर्तों के मुताबिक काम नहीं कर रही है। ठेके की शर्तों के अनुसार फर्म को कचरा उठाने के लिए 23 ऑटो टिपर लगाने थे। हर टिपर पर एक ड्राइवर और एक सफाई कर्मचारी होना जरूरी है। इसके अलावा कचरा परिवहन के लिए 6 कॉम्पेक्टर गाड़ियां, एक एक्सकेवेटर-कम-लोडर मशीन, 2 डंपर ट्रक और 5 ट्रैक्टर-ट्रॉली लगाने की शर्त है। साथ ही प्रत्येक कचरा ट्रांसफर स्टेशन (एमटीएस) पर दो-दो सफाईकर्मी लगाकर नियमित सफाई करवानी थी। जांच में ये सभी व्यवस्थाएं पूरी नहीं मिलीं। महापौर पारस सिंघवी ने कहा कि लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी यूडीए क्षेत्रों में ठीक से सफाई नहीं हो रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यदि फर्म तय शर्तों के मुताबिक काम नहीं करती है, तो उसे डिबार करने की कार्रवाई कर तीन दिन में रिपोर्ट पेश की जाए। बैठक में आयुक्त अभिषेक खन्ना, उपनगर नियोजक सिराजुद्दीन, अधिशासी अभियंता अखिल गोयल, निगम पुलिस निरीक्षक मांगीलाल डांगी और क्षेत्रीय पार्षद विजय आहूजा मौजूद रहे। बैठक में प्रभावित आठ परिवारों के प्रतिनिधि सुनील कालरा, पुरुषोत्तम लीलानी, ओमप्रकाश डोडेजा, संजय पाहूजा, स्वरूप विनोद तुलसीजा, नंदलाल बुद्धराज, मनोज कालरा और सुजाता कालरा के साथ बातचीत कर आपसी सहमति बनाई गई।