सूर्य की रहस्यमयी गतिविधियों, सौर विस्फोटों और पृथ्वी के अंतरिक्षीय वातावरण पर उनके प्रभावों को समझने के लिए उदयपुर सोलर फिजिक्स मीटिंग-2026 शुरू हुई। उदयपुर की फतहसागर झील सौर वेधशाला में तीन दिन की राष्ट्रीय स्तरीय मीटिंग बुधवार को शुरू हुई। इसमें देश की प्रतिष्ठित अनुसंधान प्रयोगशालाओं, इसरो केंद्रों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और विभिन्न विश्वविद्यालयों के लगभग 75 वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता सूर्य और अंतरिक्ष मौसम से जुड़े महत्वपूर्ण वैज्ञानिक विषयों पर मंथन कर रहे हैं। भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) की उदयपुर सौर वेधशाला की मेजबानी में 28 से 30 अक्टूबर तक आयोजित इस वैज्ञानिक बैठक का मुख्य विषय सौर घटनाएं और अंतरिक्ष मौसम रखा गया है। तीन दिनों तक वैज्ञानिक सूर्य पर होने वाले विस्फोटों, उनसे उत्पन्न गतिविधियों के अंतरिक्ष में प्रसार तथा पृथ्वी के आसपास के अंतरिक्षीय वातावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन और विश्लेषण करेंगे। आदित्य-एल 1 से सूर्य के अध्ययन को मिली नई दिशा - प्रो. जगदेव बैठक के पहले दिन पीआरएल का अमृत व्याख्यान रहा। इसमें प्रख्यात सौर वैज्ञानिक प्रो. जगदेव सिंह ने सूर्य के अध्ययन में हुई वैज्ञानिक प्रगति और भविष्य की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने पृथ्वी पर स्थापित दूरबीनों और अंतरिक्ष वेधशालाओं से प्राप्त सूर्य के महत्वपूर्ण अवलोकनों के माध्यम से सौर अनुसंधान की विकास यात्रा को रेखांकित किया। प्रो. सिंह ने बताया- आधुनिक सौर अवलोकन तकनीकों ने सूर्य और उसके निरंतर परिवर्तनशील वातावरण को समझने की नई संभावनाएं विकसित की हैं। उन्होंने भारत के आदित्य-एल 1 मिशन के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सूर्य से जुड़े अनेक रहस्यों को समझना अभी शेष है। इनके समाधान के लिए भविष्य में और अधिक विशेष अंतरिक्ष अभियानों की आवश्यकता होगी। नई उपलब्धियों की ओर बढ़ रही उदयपुर वेधशाला इससे पहले पीआरएल के डीन प्रो. एस. पल्लमराजू ने प्रो. जगदेव सिंह का परिचय कराते हुए सौर भौतिकी और सौर अवलोकन के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदानों पर प्रकाश डाला। पीआरएल के निदेशक प्रो. अनिल भारद्वाज ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का स्वागत करते हुए उदयपुर सौर वेधशाला की गौरवशाली वैज्ञानिक यात्रा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वेधशाला की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होना भारतीय सौर अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह अवसर सौर भौतिकी अनुसंधान के नए दौर में प्रवेश का भी प्रतीक है। उन्होंने वेधशाला में स्थापित अत्याधुनिक मल्टी-एप्लीकेशन सोलर टेलीस्कोप का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि इस दूरबीन ने संचालन के 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों को आधुनिक तकनीकों और सौर आंकड़ों के विश्लेषण में दक्ष बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से युवा शोधकर्ताओं को अंतरिक्ष विज्ञान की नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया जा सकता है। युवा वैज्ञानिकों ने सीखी सूर्य के आंकड़ों के विश्लेषण की बारीकियां राष्ट्रीय बैठक के पहले दिन पीएचडी विद्यार्थियों और युवा वैज्ञानिकों के लिए विशेष सोलर डेटा एनालिसिस वर्कशॉप का आयोजन भी किया गया। इसमें प्रतिभागियों को सौर अवलोकनों से प्राप्त आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण और अनुसंधान कौशल को विकसित करने का अवसर मिला। वैज्ञानिकों ने देखीं सूर्य की वास्तविक समय की तस्वीरें बैठक में शामिल वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने फतहसागर झील के मध्य द्वीप पर स्थित उदयपुर सौर वेधशाला का भ्रमण भी किया। इस दौरान उन्होंने वेधशाला में स्थापित दूरबीनों से प्राप्त सूर्य की वास्तविक समय की छवियों का अवलोकन किया। वैज्ञानिकों ने सूर्य के अध्ययन में धरातल पर स्थापित वेधशालाओं की उपयोगिता तथा अंतरिक्ष अभियानों से प्राप्त आंकड़ों के साथ उनकी पूरक भूमिका को समझा। इस भ्रमण ने प्रतिभागियों को सौर अनुसंधान की व्यावहारिक तकनीकों से रूबरू होने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. भुवन जोशी ने बताया कि यह आयोजन देश के विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के बीच विचारों के आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान और वैज्ञानिक सहयोग को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण मंच है। 29 और 30 अक्टूबर को आयोजित वैज्ञानिक सत्रों में अंतरिक्ष मौसम, सौर विस्फोटों, सौर एक्स-रे खगोल विज्ञान, आदित्य- एल 1 सहित अन्य सौर अभियानों से प्राप्त अवलोकनों तथा सौर उपकरणों के क्षेत्र में हो रही नवीनतम प्रगति पर चर्चा होगी।