उदयपुर में सिटी रेलवे स्टेशन से कलेक्टर बंगले तक एलिवेटेड रोड का काम चल रहा है। इसे बनाने के लिए यहां लगे हुए पेड़ों को हटाया गया। शहर के सबसे व्यस्त उदियापोल चौराहा पर एलिवेटेड रोड के बीच बाधा बन रहे 15 साल पुराने 40 पेड़ों को निगम ने 3 दिन में शिफ्ट किया। इस अभियान का गुरुवार रात से आगाज हुआ था। इसके बाद शुक्रवार और शनिवार रात को पेड़ों की शिफ्टिंग की गई। नगर निगम कमिश्नर अभिषेक खन्ना खुद अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे थे। 3 रात में 11 से 2 बजे तक यह शिफ्टिंग की गई। इसके बाद अब उदियापोल चौराहे के सभी पेड़ निगम के नेहरू बाल उद्यान में लगा दिए गए हैं। उदयपुर में इस तरह का अपने आप में अनोखा ट्री ऑपरेशन हुआ। जहां 10 से 35 फीट ऊंचाई वाले पेड़ों की शिफ्टिंग हुई। आमतौर पर जब शहरों में पुल या सड़कें बनती हैं, तब सबसे पहले पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलती है, लेकिन उदयपुर नगर निगम की इस स्मार्ट प्लानिंग की तारीफ हो रही है। एक किलोमीटर दूर किया गार्डन में शिफ्ट देश में ट्री शिफ्टिंग के एक्सपर्ट डॉ. बीएल चौधरी के नेतृत्व में यह शिफ्टिंग हुई। इन पेड़ों को जड़ों समेत निकालने का काम शुरू हुआ। यह कोई मामूली काम नहीं था, क्योंकि इन पेड़ों को यहां से करीब एक किलोमीटर दूर निगम के बगीचे में सुरक्षित शिफ्ट करना था। 15 साल पुराने करीब 40 पेड़ों को कटने से बचा लिया गया। इन पेड़ों को उखाड़ा नहीं गया, बल्कि उन्हें नई जगह नगर निगम के नेहरू बाल उद्यान गार्डन में लगाने के लिए शिफ्ट किया गया। 136 करोड़ की लागत से बनेगी 2.7 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड उदयपुर में सिटी रेलवे स्टेशन से कलेक्टर बंगले तक 136 करोड़ की लागत से 2.7 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड का काम तेजी से चल रहा है। उदियापोल चौराहे के ठीक बीच में रोड के पिलर बनने हैं। 117 पिलर्स पर यह रोड बनेगा। ऐसे में वहां खड़े पेड़ों को हटाना मजबूरी थी। नगर निगम ने पेड़ों को नई जिंदगी देने का फैसला किया। इनमें ज्यादातर 'पाम-ट्री' हैं, जो चौराहे की शान बढ़ा रहे थे। गुरुवार रात को 6 पेड़ों को नेहरू बाल उद्यान में शिफ्ट किया था। इसके बाद तीनों रात में 40 पेड़ों को चौराहे से हटाकर निगम के गार्डन में शिफ्ट किया गया। सभी पेड़ों की कीमत 70 लाख रुपए जिन 40 पेड़ों को बचाया गया, उनमें से कई की कीमत बाजार में 2 लाख रुपए तक है। अगर इन सभी पेड़ों की कुल वैल्यू देखें तो यह 60 से 70 लाख रुपए के हैं। निगम ने सूझबूझ दिखाई और महज सवा लाख रुपए के खर्चे में इन लाखों के कीमती पेड़ों को बचा लिया। ट्री एक्सपर्ट ने पेड़ोंं को शिफ्ट करने की संभाली व्यवस्था इस पूरे ऑपरेशन के असली हीरो डॉ. बीएल चौधरी हैं। इन्हें पेड़ों का जादूगर कहा जाता है, जो अब तक देश-दुनिया में 15 हजार से ज्यादा पेड़ों को नई जिंदगी दे चुके हैं। उनकी देखरेख में एमएम एग्रोटेक की टीम ने बड़े ही वैज्ञानिक तरीके से खुदाई की। सबसे पहले पेड़ों के चारों तरफ तीन से चार फीट गहरा खड्डा खोदा गया। कोशिश यह थी कि पेड़ की जड़ें और उनके साथ लगी मिट्टी सुरक्षित रहे। जब पेड़ अपनी मिट्टी के साथ पूरी तरह ढीला हो गया, तो क्रेन की मदद से उसे बहुत धीरे से उठाकर ट्रेलर पर लिटाया गया। इन ऊंचे-ऊंचे पेड़ों को ट्रेलर में भरकर ले जाना किसी फिल्म के सीन जैसा लग रहा था। मौके पर मौजूद लोगों की भीड़ यह सब देखकर हैरान थी। लोग खुश थे कि विकास की दौड़ में हरियाली की बलि नहीं दी जा रही है। निगम के गार्डन में इन पेड़ों के लिए घर पहले से तैयार था। वहां सात-आठ फीट गहरे और चौड़े गड्ढे खोदकर उनमें खाद-मिट्टी डाल दी गई थी। जैसे ही पेड़ वहां पहुंचे, उन्हें क्रेन से उतारकर सीधे नए गड्ढों में शिफ्ट कर दिया गया। निगम कमिश्नर अभिषेक खन्ना ने बताया- शहर के किसी भी निर्माण कार्य में पेड़ों को कम से कम नुकसान हो, यह कोशिश हमेशा रहती है। उदियापोल के ये 15 साल पुराने पेड़ शहर की विरासत जैसे हैं। उदयपुर जैसे शहर के लिए पर्यावरण को बचाना बहुत जरूरी है। ……………… इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… उदयपुर में आधी रात 40पेड़ों को बचाने का काम शुरू:एलिवेटेड रोड के लिए कटने वाले थे; एक्सपर्ट्स की मदद से नेहरू बाल उद्यान में हो रही शिफ्टिंग