यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ यूनानी, टोंक में शैक्षणिक सुविधाओं की कमी और फीस वृद्धि को लेकर प्रोग्रेसिव वेलफेयर कमेटी ने सवाल उठाए हैं। कमेटी ने सालाना फीस 90 हजार रुपए से बढ़ाकर 1 लाख 10 हजार रुपए करने को अनुचित बताते हुए इसे वापस लेने और फीस 50 हजार रुपए से कम करने की मांग की है। कमेटी ने बिना डिप्लोमा के लैब टेक्नीशियन रखे जाने के मामले की जांच कराने सहित कॉलेज में व्याप्त अन्य कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया। मुख्यमंत्री, आयुष मंत्री और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलपति के नाम कलेक्टर के माध्यम से सौंपे ज्ञापन में कमेटी ने कहा कि वर्ष 2016 से संचालित कॉलेज में करीब 10 साल बाद भी यूजी स्तर की सभी शैक्षणिक और क्लिनिकल सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। नियमित फैकल्टी की कमी के कारण पढ़ाई गेस्ट फैकल्टी और यूटीबी स्टाफ के भरोसे संचालित होने का आरोप भी लगाया गया। कमेटी का कहना है कि जब कॉलेज में निर्धारित सुविधाएं और स्थायी शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो विद्यार्थियों पर फीस बढ़ोतरी का अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं है। अधिकांश विद्यार्थी मध्यमवर्गीय और ग्रामीण परिवारों से आते हैं। ऐसे में बढ़ी फीस उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ाएगी। कमेटी ने उपलब्ध सुविधाओं के अनुरूप फीस तय करने की मांग की। ज्ञापन में कॉलेज में पीजी कक्षाएं शुरू करने, फैकल्टी की नियमित नियुक्ति, कैडर एवं सेवा नियमों को अंतिम रूप देने और नियुक्तियों की जांच कराने की मांग भी की गई। साथ ही ठेका कार्मिकों को उच्च कुशल श्रेणी में रखने की मांग उठाई। ज्ञापन देने वालों में सरताज अहमद, अमजद्दुल्लाह सहित विद्यार्थी और कमेटी के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।