साइबर ठगों के निशाने पर अब बेरोजगार भी आ गए हैं। ये ठग नौकरी की तलाश करने वालों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। इसके चलते असली और फर्जी नौकरी के बीच पहचान करना बेहद मुश्किल हो रहा है। भर्ती मंच इनडीड के 1,161 भारतीय कर्मचारियों पर किए गए सर्वे में खुलासा हुआ है कि 93 फीसदी लोगों को कभी न कभी फर्जी या संदिग्ध नौकरी का ऑफर मिला, जबकि 51% यह तय ही नहीं कर पाए कि नौकरी देने वाला असली है या ठग। इससे 75% लोगों ने केवल शक के कारण नौकरी का अवसर छोड़ दिया, जबकि कई मामलों में अवसर सही था। इनडीड के टैलेंट स्ट्रैटेजी एडवाइजर रोहन सिल्वेस्टर के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया में सबसे बड़ी जरूरत भरोसे की है। कंपनियों को आधिकारिक माध्यमों से भर्ती की जानकारी देनी चाहिए और रिक्रूटर्स की पहचान स्पष्ट रखनी चाहिए, ताकि उम्मीदवार सुरक्षित महसूस करें। नौकरी के नाम पर ठगी का सबसे बड़ा नुकसान मानसिक और सामाजिक है। फर्जी प्रस्तावों के चलते 31% लोगों ने कहा कि उनका कंपनियों और नियोक्ताओं पर भरोसा कम हुआ। 19% तनाव और चिंता में रहे। जबकि 14% ने बाद में असली नौकरी के अवसर भी ठगी के डर से छोड़ दिए। 3% लोगों ने आर्थिक नुकसान होने की बात कही। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को सत्यापित भर्ती प्रोफाइल, आधिकारिक ईमेल, प्रमाणित जॉब पोस्टिंग और स्पष्ट चयन प्रक्रिया अपनानी होगी। इससे ही उम्मीदवारों का भरोसा लौटेगा। भास्कर एक्सप्लेनर कंपनी की मेल आईडी जरूर चेक करें कोई भी कंपनी इंटरव्यू से पहले रजिस्ट्रेशन या जॉइनिंग फीस नहीं मांगती। साइबर ठग फर्जी जॉब पोर्टल, व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए युवाओं को निशाना बनाते हैं। किसी भी नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, ईमेल आईडी और रिक्रूटर की पहचान की पुष्टि जरूर करनी चाहिए। डिजिटल भर्ती बढ़ने के साथ सतर्क होना जरूरी है। -धीरज विजयवर्गीय, आईटी एक्सपर्ट रिक्रूटर्स के माध्यम से भर्तियां हों आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, ई-कॉमर्स तथा सेवा क्षेत्र में बड़ी संख्या में भर्तियां हो रही हैं। ऐसे समय में फर्जी भर्ती और जॉब स्कैम नौकरी तलाशने वाले युवाओं का भरोसा तोड़ते हैं। इससे कंपनियों की साख को भी नुकसान पहुंच रहा है। मद्देनजर उद्योगों को आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और सत्यापित रिक्रूटर्स के माध्यम से भर्ती करनी चाहिए। -सुरेश अग्रवाल, अध्यक्ष फोर्टी