“मैं खुद अपने परिवार को डूबते हुए देखता रहा और कुछ नहीं कर सका। हादसे में मैंने अपना बेटा, पत्नी समेत परिवार के 9 सदस्य खो दिए। कुछ ही मिनटों में खुशियों से भरी यात्रा मातम में बदल गई। हमारी दुनिया उजड़ गई।” यह कहते हुए वृंदावन में नाव हादसे में अपनों को खो चुके और खुद उसी नाव में सवार विजय कुमार रो पड़ते हैं। 10 अप्रैल को को यह हादसा हुआ। इसमें 13 लोगों की मौत हुई, 3 की तलाश जारी है। विजय ने हादसे के आखिरी 7 मिनट का मंजर बताया। विजय ने कहा कि नाव में कीर्तन के कारण काफी लोग आ गए थे। विजय ने कहा कि जब हमारी नाव नए निर्माणाधीन पुल के नजदीक पहुंची तो वहां लगे लोहे के डैम को क्रेन ने खींच लिया। इतने में तेज हवा आई और नाव पिलर की तरफ गई। इसी दौरान रस्सी फंसने से पिलर से टकराकर नाव पलट गई। विजय ने कहा कि जैसे ही सभी लोग पानी में गिरे तो चिल्लाने लगे। मैं, बेटा और कुछ अन्य लोग जो तैरना जानते थे, वह पानी में छटपटाते रहे। बेटा मधुर अपनी मां को बचाने के लिए लड़ता रहा, लेकिन उसे बचाते-बचाते खुद ही डूब गया। हम उसे बाहर तो निकाल लाए, लेकिन उसे बचा नहीं सके। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… आखिरी 7 मिनट की कहानी विजय की जुबानी… यात्रा ले जाने वाले यशु बोले- वहां लाइफ जैकेट देते ही नहीं… -------------------------- ये खबरें भी पढ़ें… बांके बिहारी क्लब क्या है, लुधियाना में 3 युवकों ने बनाया, पहले भजन करते थे वृंदावन में हुए नाव हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। इन सभी को लुधियाना के जगराओं का ‘बांके बिहारी क्लब’ धार्मिक यात्रा पर लेकर गया था। जिसे आज से करीब 9 साल पहले दो सगे भाइयों और एक अन्य युवक ने मिलकर बनाया। इसी हादसे में इन दो भाइयों में से एक की मौत भी हो गई। (पढ़ें पूरी खबर) पिता के लिए मन्नत मांगने आई BA छात्रा की मौत:मां की भी गई जान, बहन लापता; वृंदावन हादसे में मृतकों की संख्या 13 हुई मथुरा के वृंदावन में नाव हादसे में अब तक 13 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। 22 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। 3 लोग अब भी लापता हैं। रविवार को तीसरे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। सेना, NDRF-SDRF समेत करीब 250 लोगों की टीम ऑपरेशन में लगी हुई है। अब जांच का दायरा 14 किमी से बढ़ाकर 20 किमी कर दिया गया है। (पढ़ें पूरी खबर)