‘आज थलवट धरा ऊपर, भलो उग्यो भाण जी, आदि शक्ति हिंगलाचा, अवतरया है आण जी... चिरंजा के इन गूंजते भक्तिमय स्वरों और नगाड़ों की थाप के बीच रविवार को मां करणी के 639वें जन्मोत्सव मनाया गया। देशनोक में आस्था का ऐतिहासिक सैलाब उमड़ा। सुबह ठीक 9:05 बजे विश्व प्रसिद्ध श्री करणी माता निज मंदिर से गाजे-बाजे और शाही लवाजमे के साथ भव्य शोभायात्रा रवाना हुई। देश-प्रदेश के कोने-कोने से पहुंचे हजारों श्रद्धालु मां की अगवानी में हाथ जोड़े कतारबद्ध नजर आए। सप्तमी के पावन अवसर पर शोभायात्रा के दौरान जैसे ही नीले आसमान में सांवली (चील) मंडराती नजर आई, समूची करणी नगरी मां के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठी। लोक-मान्यता के अनुसार जन्मोत्सव की सप्तमी पर सांवली का दिखना साक्षात मां करणी के स्वरूप और आशीर्वाद का शुभ संकेत माना जाता है। इस अलौकिक दृश्य ने भक्तों के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया। शाही लवाजमे के साथ निकली सजीव झांकियों का देशनोक के मुख्य मार्गों पर पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। तीन घंटे से अधिक समय तक चली यह शोभायात्रा तेमड़ाराय मार्ग होते हुए तेमड़ाराय मंदिर पहुंची, जहां विशेष पूजा-अर्चना व आरती संपन्न हुई।