भास्कर न्यूज | नागौर श्रावण मास के समापन पर शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान हुए। शहर के हृदयस्थल बंशीवाला मंदिर परिसर स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर में मासिक रुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। वहीं, प्रताप सागर की पाल स्थित अति प्राचीन बड़लेश्वर महादेव मंदिर में श्रावण मास पर्यंत चले रुद्राभिषेक की हवनात्मक पूर्णाहुति की गई। मंदिरों में भगवान शिव का अभिषेक, पूजन और विशेष शृंगार कर श्रद्धालुओं ने सुख-शांति एवं विश्व कल्याण की कामना की। पातालेश्वर महादेव मंदिर में श्रावण मास के दौरान किए गए रुद्री पाठ संकल्प की पूर्णता के लिए शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी पाठ की दशांश आहुतियां दी गईं। घृत-शाकल्य से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां देकर श्रावण मास का रुद्री पाठ संकल्प हवनात्मक रूप से पूर्ण किया गया। रुद्रीपाठी बंधुओं ने भगवान भोलेनाथ की आराधना कर नागौर सहित संपूर्ण विश्व के कल्याण की प्रार्थना की। पातालेश्वर महादेव रुद्रीपाठी संघ के सदस्य मनीष पुरोहित ने बताया कि पिछले तीन दशक से श्रावण मास में यह वैदिक अनुष्ठान लगातार किया जा रहा है। यज्ञ में वेदपाठी रितेश सोनी, जगदीश प्रसाद बजाज, नृसिंह राठी, महेंद्र कच्छावा और संजय जांगिड़ ने सपत्नीक सहभागिता की। पंडित हनुमान प्रसाद दाधीच, नितेश श्रीमाली, पिंटू श्रीमाली, गोविंद दाधीच, राकेश गौड़ और पं. गोपाल शर्मा सहित अन्य सहायक आचार्यों के सान्निध्य में यज्ञ संपन्न हुआ। बंशी वाला मंदिर परिसर स्थित पातालेश्वर महादेवमंदिर प्रवक्ता पदमचंद प्रजापत ने बताया कि रुद्र यज्ञ का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष की कामना नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के कल्याण की भावना है। पूर्णाहुति के अवसर पर भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती से नागौर सहित पूरे विश्व में सुख, शांति और कल्याण की प्रार्थना की गई। प्रताप सागर की पाल स्थित बड़लेश्वर महादेव मंदिर में भी रुद्राभिषेक की हवनात्मक पूर्णाहुति हुई। मंदिर के पुजारी नारायण दास ने बताया कि सुबह अभिषेक के बाद रुद्र पाठ की पूर्णाहुति हवन के साथ की गई। मुख्य जजमान प्रेमनारायण बोहरा, विनोद व्यास, विवेक व्यास, बद्रीनारायण एवं हर्ष सोनी ने सपत्नीक अभिषेक और हवन में सहभागिता की। पं. भगवान दास एवं कैलाशजी के सान्निध्य में पांच पंडितों ने संपूर्ण पाठ और यज्ञ करवाया। आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई। आयोजन में शिवशंकर व्यास, शशिकांत आचार्य, नवरत्न आचार्य, रामकुमार पुरोहित, अशोक बोड़ा, गोविंद सोनी, सुखबीर भाटी, आनंद पुरोहित, सुनील हर्ष मौजूद रहे। बड़लेश्वर महादेव मंदिर में महाकालेश्वर स्वरूप में शृंगार।