नगर परिषद चुनाव में भाजपा की ओर से प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद पार्टी के भीतर बगावत के सुर तेज हो गए हैं। टिकट नहीं मिलने से नाराज भाजपा के कई दावेदारों ने पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। पूर्व पालिकाध्यक्ष मनोहर सिंह, पूर्व पार्षद मनीष कच्छवाह और चार बार पार्षद रह चुके ओमप्रकाश सांखला ने टिकट कटने के बाद निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान किया है। इससे भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भाजपा ने नगर परिषद के 60 वार्डों में से 47 वार्डों में प्रत्याशी उतारे हैं। पार्टी की सूची में 22 अलग-अलग जातियों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इनमें माली समाज को सबसे ज्यादा 14 और जाट समाज को 5 टिकट मिले हैं। मुस्लिम और वैश्य समाज को 3-3 टिकट दिए गए हैं। मनोहर सिंह टिकट के प्रबल दावेदार थे पूर्व पालिकाध्यक्ष मनोहर सिंह वार्ड 6 से भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। बुधवार तक उनका टिकट लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन अंतिम समय में टिकट कट गया। इसके बाद उनके समर्थकों में नाराजगी फैल गई। पार्टी की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश की गई, लेकिन अब मनोहर सिंह के निर्दलीय चुनाव लड़ने की चर्चा से भाजपा की चिंता बढ़ गई है। मनोहर सिंह का कहना है कि बाहर से आए नेताओं को पार्टी की कार्यकारिणी में जगह दी गई, जबकि पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई है। उन्होंने अब निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात कही है। चार बार के पार्षद ओमप्रकाश सांखला भी निर्दलीय लड़ेंगे भाजपा के टिकट पर लगातार चार बार पार्षद रह चुके ओमप्रकाश सांखला का भी इस बार टिकट काट दिया गया। उनकी जगह पार्टी ने कांग्रेस समर्थित रहे गुलाबचंद सांखला को टिकट दिया है। टिकट कटने के बाद ओमप्रकाश सांखला ने भाजपा के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने टिकट वितरण को लेकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि, “मैं पार्टी का पुराना कार्यकर्ता और स्टार प्रचारक रहा हूं। मेरा जयपुर से टिकट फाइनल था, लेकिन नागौर में टिकट काट दिया गया।” उन्होंने भाजपा जिलाध्यक्ष रामधन पोटलिया पर भी निशाना साधते हुए उन्हें “बरसाती मेंढक” कहा। पूर्व पार्षद मनीष ने भी निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात कही पूर्व पार्षद मनीष कच्छवाह ने भी टिकट कटने पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि वे पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं और पिछली बार 622 मतों से चुनाव जीते थे। मनीष के अनुसार उनका टिकट फाइनल था, लेकिन नागौर के कुछ पदाधिकारियों ने प्रदेश स्तर के नेताओं की बात नहीं मानी। उन्होंने कहा कि इसका खामियाजा अब पार्टी को भुगतना पड़ेगा और वे निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। वैष्णव समाज में भी टिकट को लेकर नाराजगी भाजपा ने वार्ड 3 से नैमीचंद वैष्णव और वार्ड 4 से मंजू वैष्णव को टिकट दिया है। इन दोनों वार्डों में भी टिकट वितरण को लेकर पार्टी के अंदर चर्चा है। लंबे समय से पार्टी से जुड़े दावेदारों के टिकट कटने के बाद कार्यकर्ताओं में नाराजगी सामने आ रही है। राजपूत समाज को टिकट नहीं मिलने पर सवाल भाजपा ने 60 में से फिलहाल 47 वार्डों में प्रत्याशियों की घोषणा की है। सूची में माली, जाट, मुस्लिम, वैश्य, सैनी, मेघवाल, ब्राह्मण, गुर्जर, रैबारी, बंजारा, जैन, वाल्मीकि और कंसारा सहित कई समाजों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। वहीं राजपूत समाज को एक भी टिकट नहीं मिलने को लेकर भी पार्टी के भीतर सवाल उठ रहे हैं। भाजपा के सामने नाराज नेताओं को मनाने की चुनौती टिकट वितरण के बाद अब भाजपा नेतृत्व के सामने नाराज दावेदारों को मनाने की चुनौती है। पूर्व पालिकाध्यक्ष, पूर्व पार्षद और चार बार पार्षद रह चुके नेता के निर्दलीय मैदान में उतरने से कई वार्डों में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनौती बढ़ सकती है। यदि नाराज दावेदार नामांकन दाखिल कर चुनाव मैदान में डटे रहते हैं तो इसका असर भाजपा के वोटों के समीकरण पर पड़ सकता है।