एक मेगावाट का सोलर या विंड पावर प्लांट लगाने के लिए अधिकतम 2 हेक्टेयर जमीन ही मिलेगी। सोलर व विंड प्लांट के संयुक्त प्रोजेक्ट के लिए यह 2.5 हेक्टेयर होगी। अब सरकार से मिलने वाली जमीन के 10% हिस्से में पेड़ लगाना अनिवार्य होगा। सोलर व विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स लगाने वाली कंपनियों के लिए जमीन आवंटन के नियम बदल दिए हैं। ऊर्जा विभाग के डिप्टी सचिव मनोज मित्तल ने नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इस नोटिफिकेशन के बाद प्रदेश में सोलर व विंड प्रोजेक्ट में निवेश बढ़ेगा।इससे स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, इसके साथ ही प्रदेश के उपभोक्ताओं को सस्ती व निर्बाध बिजली सप्लाई की सुविधा का रास्ता भी खुलेगा।ग्रिड कनेक्शन मिला तो 2 साल में इस्तेमाल करना होगा नई व्यवस्था में बिजली को आगे भेजने की मंजूरी को लेकर भी समय सीमा तय की गई है। वितरण कंपनी या राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम से ट्रांसमिशन की मंजूरी मिलने के बाद उसका 2 साल के भीतर इस्तेमाल करना जरूरी होगा। तय अवधि में इस्तेमाल नहीं होने पर यह सुविधा किसी दूसरे बिजली परियोजना डेवलपर को दी जा सकेगी। इसके अलावा जमीन के पट्टे या आगे पट्टे पर देने से जुड़े दस्तावेजों पर लगने वाला स्टाम्प शुल्क परियोजना लगाने वाली कंपनी को ही देना होगा। बैटरी स्टोरेज लगाने वालों को शुल्क में 50 फीसदी तक छूट मिलेगी सरकार ने बिजली भंडारण परियोजनाओं को भी प्रोत्साहन दिया है। बैटरी आधारित स्टोरेज व्यवस्था लगाने वाली पात्र परियोजनाओं को पंजीकरण शुल्क में 50% तक की छूट मिल सकती है। निर्धारित सीमा से अधिक स्टोरेज क्षमता विकसित करने पर अतिरिक्त क्षमता के अनुपात में पूरी छूट का प्रावधान भी किया गया है। बिजली भंडारण के लिए शुल्क क्षमता के आधार पर तय किया गया है। बांध आधारित बिजली भंडारण परियोजना के लिए 10 लाख रुपए पंजीकरण शुल्क तय किया गया है, जो वापस नहीं होगा। अब 1000 मेगावाट से बड़ी परियोजनाओं को भी जमीन सरकार ने 1000 मेगावाट से क्षमता वाली सौर, पवन, हरित हाइड्रोजन और बिजली भंडारण परियोजनाओं के लिए जमीन देने का रास्ता साफ कर दिया है। इधर, सुरक्षा राशि सरकार स्थायी नहीं रखेगी। बिजली उत्पादन पर जितनी क्षमता चालू होगी, उसके अनुपात में राशि वापस होगी। 1000 मेगावाट के लिए 10 करोड़ सुरक्षा राशि है। 500 मेगावाट उत्पादन पर 5 करोड़ वापस होंगे।