राजस्थान पुलिस की केंद्रीय साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ₹6.80 करोड़ के बॉस स्कैम मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। बाड़मेर निवासी तगाराम पर साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए अपना बैंक खाता उपलब्ध कराने का आरोप है। आरोपी ने कमीशन के बदले अपना खाता दूसरे व्यक्ति को दिया था। इस मामले में अब तक 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ADG साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया- जांच के दौरान तगाराम की भूमिका सामने आने पर उसे बाड़मेर से गिरफ्तार कर जयपुर लाया गया। म्यूल खातों से लेकर यूएसडीटी तक, ठगी की रकम खपाने का नेटवर्क जांच में सामने आया कि गिरोह साइबर ठगी की रकम को प्राप्त करने, छिपाने और अलग-अलग स्तरों पर ट्रांसफर करने के लिए म्यूल बैंक खाते, एटीएम, चेक, यूपीआई, क्यूआर कोड, डिजिटल वॉलेट और यूएसडीटी (क्रिप्टो करेंसी) का इस्तेमाल करता था। गिरोह टेलीग्राम ग्रुप के जरिए फर्जी या म्यूल बैंक खातों, एटीएम, सिम और पासबुक की किट उपलब्ध कराता था। ठगी की रकम खातों में पहुंचते ही एटीएम और चेक से नकद निकाली जाती। साथ ही यूपीआई, क्यूआर कोड, सीडीएम और दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। कई खातों में लेयरिंग के बाद क्रिप्टो में बदलते थे रकम ठगी की रकम को लगातार अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर उसकी लेयरिंग की जाती थी। इसके बाद रकम को यूएसडीटी या अन्य क्रिप्टो करेंसी में बदलकर आगे भेजा जाता था। इसके लिए बाइनेंस जैसे क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और टेलीग्राम पर उपलब्ध क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया जाता था। बैंक खाते में आए थे ढाई लाख रुपए पुलिस जांच में बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों से तगाराम की भूमिका सामने आई। आरोपी ने अपना बैंक खाता हरेंद्र उर्फ हनी को उपलब्ध कराया था। इस खाते में 24 अगस्त 2026 को 2.50 लाख रुपए आए थे। इसके बाद तगाराम, हरेंद्र के साथ बैंक पहुंचा और खाते से रकम निकालने का प्रयास किया। वॉट्सएप से बैंक ट्रांजेक्शन तक खंगाली जा रही मनी ट्रेल पुलिस अब आरोपियों के वॉट्सएप रिकॉर्ड, सीडीआर, सीएएफ आईडी, आईपीडीआर और बैंकिंग ट्रांजेक्शन का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। ठगी की रकम आगे किन-किन खातों में पहुंची और नेटवर्क में कौन-कौन लोग जुड़े हैं। इसका पता लगाने के लिए मनी ट्रेल खंगाली जा रही है। कार्रवाई डीआईजी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह के निर्देशन में केंद्रीय साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन राजस्थान जयपुर के थानाधिकारी और डीएसपी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने की। टीम में पुलिस निरीक्षक नीरज कुमार, एएसआई राकेश कुमार, हेड कॉन्स्टेबल बृजलाल और कॉन्स्टेबल सच्चिदानंद शामिल रहे।
ये खबरें भी पढ़ें... बीटेक और फिजियोथेरेपी स्टूडेंट निकले ‘बॉस स्कैम’ के मास्टरमाइंड:कंपनी के डायरेक्टर बनकर 6.80 करोड़ ठगे, टारगेट पर थे हाईप्रोफाइल बिजनेसमैन जयपुर की एक बड़ी कंपनी में अकाउंट संभालने वाले कर्मचारी के पास अचानक 'बॉस' का वॉट्सएप पर मैसेज आया। मैसेज में लिखा था- जल्दी से इस खाते में 6 करोड़ 80 लाख रुपए ट्रांसफर कर दो। (पूरी खबर पढ़ें)
कंपनी-डायरेक्टर के वॉट्सएप नंबर बदल कर्मचारी से 7 करोड़ ठगे:सिंगापुर-हांगकांग से मास्टरमाइंड ने 250 खातों में भेजे रुपए; 4 साइबर ठग गिरफ्तार जयपुर में साइबर ठगों ने खुद को कंपनी का डायरेक्टर बताकर कंपनी के अकाउंटेंट से 6 करोड़ 80 लाख रुपए ठग लिए। आरोपियों ने कंपनी के अकाउंटेंट के कंप्यूटर में मौजूद तकनीकी खामी का फायदा उठाकर वॉट्सएप वेब तक पहुंच बनाई। इसके बाद कंपनी निदेशक का नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल कर बदमाशों ने अपने नंबर डाल दिए। इसके बाद अकाउंटेंट को फर्जी मैसेज भेजे थे। (पूरी खबर पढ़ें)