कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने सोमवार को अपने जन्मदिन पर टेरिटोरियल आर्मी में शामिल होने के दिन को याद करते हुए पोस्ट किया है। पायलट ने टेरिटोरियल आर्मी की अपनी यूनिट 124 सिख रेजिमेंट ​का हिस्सा होने को गर्व की बात बताया है। पायलट को शनिवार को ही कांग्रेस ने पंजाब के प्रभारी महासचिव की जिम्मेदारी दी है। सचिन पायलट ने X पर लिखा- साल 2012 में इसी दिन मुझे तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल विक्रम सिंह ने टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट के तौर पर कमिशन्ड किया। पीछे मुड़कर देखें तो लगता है, केंद्रीय मंत्री के तौर पर काम करते हुए कमीशन मिलना अपने आप में कई चुनौतियों और जिम्मेदारियों वाला अनुभव था। पायलट ने आगे लिखा- लोगों की जिम्मेदारियों और सेना की सेवा के लिए जरूरी अनुशासन और समर्पण के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन यह एक ऐसा सफर रहा है, जिसे मैंने बेहद गर्व और पक्के संकल्प के साथ पूरा किया है। पायलट ने केंद्रीय मंत्री रहते 2012 में जॉइन की थी टेरिटोरियल आर्मी सचिन पायलट ने सितंबर 2012 में केंद्रीय मंत्री रहते हुए लेफ्टिनेंट के पद पर टेरिटोरियल आर्मी जॉइन की थी। इसके बाद उन्हें कैप्टन पद पर प्रमोशन मिला था। पायलट ने अक्टूबर 2023 में मेजर पद पर प्रमोशन के लिए परीक्षा दी थी। अब मेजर के पद पर हैं। पायलट हर साल कुछ समय के लिए टेरिटोरियल आर्मी में सेवाएं देते हैं। पायलट कई बार दिल्ली कैंट में अपनी यूनिट में जाते हैं। बैठकों में शामिल होते हैं। हाल ही पंजाब के प्रभारी बने हैं पायलट सचिन पायलट को कांग्रस ने पंजाब का प्रभारी महासचिव बनाया है। पायलट ने जन्मदिन के मौके पर टेरिटोरियल आर्मी की अपनी यूनिट 124 सिख रेजिमेंट पर गर्व जताया है। पंजाब प्रभारी के तौर पर इसे स्थानीय कनेक्ट से जोड़कर देखा जा रहा है। सिख रेजिमेंट से पंजाब भावनात्मक रूप से जुड़ता है। सचिन के पिता राजेश पायलट एयरफोर्स में स्क्वाड्रन लीडर थे सचिन पायलट के परिवार का बैकग्राउंड सेना का रहा है। पायलट के पिता राजेश पायलट राजनीति में आने से पहले एयरफोर्स में स्क्वाड्रन लीडर रहे थे। राजेश पायलट ने फाइटर पायलट के तौर पर भारत-पाक युद्ध में कई हवाई हमलों में हिस्सा लिया था। युद्ध होने पर मोर्चे पर भी जाना पड़ सकता है पायलट को टेरिटोरियल आर्मी एक वॉलंटियर सर्विस होती है। इसमें शामिल होने के लिए आर्मी जैसा ही सिलेक्शन प्रोसेस है। प्रवेश के लिए लिखित, फिजिकल और मेडिकल फिटनेस परीक्षा पास करनी होती है। रिटन टेस्ट के बाद सिलेक्ट होने वालों को आर्मी की ट्रेनिंग दी जाती है। टेरिटोरियल आर्मी में अफसर बनने वालों को साल में कुछ दिन अलॉटेड यूनिट में सेवा देनी होती है। युद्ध में जरूरत पड़ने पर टेरिटोरियल आर्मी के अफसर और जवानों को बुलाया जा सकता है। युद्ध हुआ तो सचिन को भी मोर्चे पर या जहां आर्मी बुलाएगी, वहां सेवाएं देनी होंगी। टेरिटोरियल आर्मी में अफसर बनने के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएट होना पहली शर्त है। बाद में लिखित और दूसरी परीक्षाएं पास करनी होती हैं। जरूरत पड़ने पर ड्यूटी पर बुलाया जाता है टेरिटोरियल आर्मी में टेस्ट पास करके नेताओं से लेकर आम आदमी तक शामिल हो सकता है। सरकारी कर्मचारी और अफसर भी अपने विभाग से अनुमति लेकर टेरिटोरियल आर्मी जॉइन कर सकते हैं। जवान और अफसर के लिए अलग-अलग परीक्षाएं होती हैं। इसमें रेगुलर सैलरी नहीं मिलती। जब इमरजेंसी यानी जरूरत पड़ती है तभी ड्यूटी पर बुलाया जाता है। उस ड्यूटी के बदले रैंक के हिसाब से सैलरी दी जाती है।