पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के डिजाइन एवं कला संकाय के दृश्य कला विभाग की ओर से ‘सृजन संवाद’ के अंतर्गत विशेष कला संवाद एवं डेमोंस्ट्रेशन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दृश्य कला विभाग के करीब 200 स्टूडेंट्स शामिल हुए, जिसका उद्देश्य स्टूडेंट्स को प्रतिष्ठित कलाकारों के अनुभवों से रूबरू कराने, उनकी रचनात्मक प्रक्रिया को समझने और कला के विभिन्न आयामों पर प्रत्यक्ष संवाद का अवसर प्रदान करना था।​ कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष एवं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के विभागाध्यक्ष प्रो. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने स्टूडेंट्स से संवाद किया। उन्होंने कला शिक्षा, भारतीय कला एवं संस्कृति, रचनात्मक अभिव्यक्ति तथा कलाकार की भूमिका पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने स्टूडेंट्स को निरंतर अभ्यास, प्रयोगधर्मिता और अपनी विशिष्ट कलात्मक पहचान विकसित करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध भारतीय समकालीन दृश्य कलाकार एवं अमूर्त चित्रकार विजय एम. धोरे ने भी विद्यार्थियों के साथ बातचीत की। उन्होंने स्टूडेंट्स से समकालीन कला, अमूर्त चित्रकला, अपनी रचनात्मक यात्रा तथा कला-सृजन की प्रक्रिया से जुड़े अनुभव साथ साझा किए। कार्यक्रम में प्रो. सुनील कुमार विश्वकर्मा एवं विजय एम. धोरे ने अपनी-अपनी कला विधा एवं रचनात्मक शैली में विद्यार्थियों के समक्ष लाइव डेमोंस्ट्रेशन प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों ने कलाकारों की कार्यप्रणाली, तकनीक, विचार प्रक्रिया एवं कलात्मक अभिव्यक्ति को प्रत्यक्ष रूप से समझा। डेमोंस्ट्रेशन के बाद स्टूडेंट्स ने दोनों कलाकारों से कला, तकनीक, सृजन प्रक्रिया, समकालीन कला, कला शिक्षा एवं भविष्य की संभावनाओं से जुड़े प्रश्न किए। दोनों वरिष्ठ कलाकारों ने विजुअल आर्ट डिपार्टमेंट में उपलब्ध स्टूडियो, कला गतिविधियों एवं रचनात्मक वातावरण का अवलोकन किया। कलाकारों ने पूर्णिमा द्वारा कला एवं रचनात्मक शिक्षा को दिए जा रहे प्रोत्साहन, विकसित किए जा रहे कलात्मक वातावरण एवं उपलब्ध संसाधनों की सराहना की। सेशन के दौरान दोनों कलाकारों द्वारा निर्मित मूल कलाकृतियों को यूनिवर्सिटी की कला-संपदा के रूप में संरक्षित किया जाएगा। ये कलाकृतियां पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के लिए महत्वपूर्ण कलात्मक धरोहर होने के साथ-साथ भविष्य के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेंगी। इस अवसर पर डिजाइन एवं कला संकाय की प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. मंजरी राय एवं डीन डॉ. जितेंद्र शर्मा के साथ सम्पूर्ण दृश्य कला विभाग की फैकल्टी मेंबर्स भी मौजूद रहे। भारतीय समकालीन दृश्य कलाकार अमित कल्ला ने कार्यक्रम का मंच संचालन किया और पूरे सत्र को प्रभावी एवं संवादात्मक रूप से आगे बढ़ाया।​ कार्यक्रम का आयोजन दृश्य कला विभाग के एचओडी प्रमेंद्र कुमार द्वारा किया गया, जबकि समन्वय डॉ. राजकुमार पांडेय ने किया। ‘सृजन संवाद’ विद्यार्थियों के लिए कला के क्षेत्र में प्रत्यक्ष अनुभव, संवाद और सीखने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। इस पहल के माध्यम से स्टूडेंट्स को प्रतिष्ठित कलाकारों की कला प्रक्रिया को करीब से समझने तथा अपनी रचनात्मक सोच को विस्तार देने का अवसर मिला।​