जयपुर से अजमेर का सफर तेज करने के लिए एनएचएआई ने एनएच-48 पर 10 फ्लाईओवर बनाए, लेकिन 136 किमी की दूरी तय करने में अब भी करीब ढाई घंटे लग रहे हैं। फ्लाईओवर बनने के बाद शुरुआत में सफर का समय ढाई घंटे से घटकर 2 घंटे 10 मिनट रह गया था। अब ट्रैफिक का दबाव बढ़ने से यह राहत भी खत्म हो गई। वर्ष 2005 में हाईवे को 6 लेन करने का काम पूरा हुआ था। तब रोज करीब 30 हजार पैसेंजर कार यूनिट (पीसीयू) का ट्रैफिक था, जो अब पांच गुना बढ़कर 1.50 लाख हो गया है। इसके बावजूद सड़क की चौड़ाई उसी अनुपात में नहीं बढ़ी। नतीजा, फ्लाईओवर से निकलने के बाद भी वाहन आगे ट्रैफिक में फंस रहे हैं। फ्लाईओवर से शुरुआत में 20 मिनट बचे, जो अब खत्म जयपुर-अजमेर हाईवे शुरुआत में 2 लेन था। तब रोज करीब 5 हजार पीसीयू ट्रैफिक था। वर्ष 2002 में इसे 6 लेन करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली और 2005 में काम पूरा हुआ। उस समय ट्रैफिक 30 हजार पीसीयू प्रतिदिन पहुंच चुका था। 2 साल पहले जयपुर-किशनगढ़ के करीब 90 किमी हिस्से पर रोज 1.20 लाख पीसीयू का दबाव था। अब 25 फीसदी बढ़कर 1.50 लाख हो गया। इन 10 जगहों पर बने फ्लाईओवर; हीरापुरा, भांकरोटा, नरसिंहपुरा, महलां, मौखमपुरा, पड़ासोली, बांदर सिंदरी, दहमी बालाजी, गाड़ोता और सांवरदा। हाईवे पर सर्विस लेन से ट्रैफिक का दबाव घटेगा जयपुर-अजमेर नेशनल हाईवे पर किशनगढ़ तक सर्विस लेन विकसित की जा रही है। इसमें दुपहिया और स्थानीय वाहनों की आवाजाही रहेगी। इससे मुख्य हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। हाईवे पर सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी और वाहनों को रफ्तार मिल सकेगी। -अजय आर्य, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई भारी वाहनों के पीछे फंस रहीं कारें, ओवरटेक करने की जगह नहीं; फ्लाईओवर की राहत आगे खत्म हाईवे पर ट्रैफिक इतना बढ़ गया है कि वाहन एक के पीछे एक चल रहे हैं। ट्रक, बस और पिकअप जैसे भारी वाहनों की रफ्तार कम होने से पीछे चलने वाली कारें भी गति नहीं पकड़ पातीं। सड़क पर पर्याप्त जगह नहीं मिलने से ओवरटेक करना मुश्किल है। ट्रैफिक कम होने पर ही वाहन चालकों को आगे निकलने का मौका मिलता है। इससे फ्लाईओवर पर मिलने वाली राहत आगे खत्म हो जाती है। एनएचएआई ने फ्लाईओवर शुरू होने के बाद जयपुर से अजमेर का 136 किमी सफर 1 घंटा 50 मिनट में पूरा होने की संभावना जताई थी, लेकिन यह समय हासिल नहीं हो सका।