कल्पना कीजिए... एक महिला हाथों में मेहंदी रचाए, माथे पर सिंदूर सजाए और छलनी से चांद को निहार रही है। आंखों में एक ही प्रार्थना है... मेरे पति की उम्र लंबी हो। लेकिन जब वह व्रत खोलेगी, तो सामने पति नहीं होगा। न कोई उसे पानी पिलाने आएगा, न कोई उसके हाथ से छलनी लेकर चांद देखेगा। फिर भी वह अपने सुहाग की सलामती के लिए व्रत रखेगी। जबकि उन्हें पतियों ने बिसरा दिया है। भरतपुर के अपना घर आश्रम में करवा चौथ पर ऐसी ही भावनाओं का सैलाब उमड़ेगा। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया के सबसे बड़े वूमेन शेल्टर होम के रूप में दर्ज इस आश्रम में 3,643 महिलाएं हैं। इनमें 212 महिलाएं ऐसी हैं, जो मानसिक रूप से स्वस्थ हो चुकी हैं। उनके घर-परिवार और पति को सूचना भी दी जा चुकी है, लेकिन वे उन्हें लेने नहीं आते। इसके बावजूद ये महिलाएं हर साल करवा चौथ का व्रत रखती हैं। इसके अलावा आश्रम में करीब 426 महिलाएं ऐसी हैं, जो मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाई हैं। याददाश्त नहीं लौटी है। वे अपने घर-परिवार का पता नहीं बता पातीं। लेकिन वे करवा चौथ का महत्व समझती हैं और इस आयोजन में शामिल होंगी। किंतु कुछ किस्मत वाली हैं। मसलन, छत्तीसगढ़ के महासमुंद के गांव कोकड़ी की कुमकुम। प्रशासनिक अधिकारी बबीता ने बताया कि करीब नौ माह पहले कुमकुम को कोटा से रेस्क्यू किया था। स्वस्थ होने पर उसने पता बताया तो पिछले दिनों पति प्रमोद चौहान लिवा ले गए। हर साल औसतन 500 लोगों का पुनर्वास करने में कामयाबी मिलती है। इस साल अब तक 448 का पुनर्वास हुआ है, जिसमें 338 महिलाएं हैं। इनमें 105 सुहागिनें थीं, जो अब अपने घर में करवा चौथ मनाएंगी। आस... शायद वे लेने आएंगे : दिल्ली की रजनी, कोलकाता की राधा, भागलपुर की रोशनी आदि के लिए करवा चौथ का मतलब सिर्फ व्रत रखना नहीं, बल्कि उस रिश्ते को जीवित रखना है, जो उनके जीवन का हिस्सा रहा है। वे पति को याद करती हैं। शायद वे उन्हें लेने आएंगे? लेकिन इंतजार हिज्र की दीवार बन रहा है। किंतु उनकी प्रार्थना नहीं बदलती। वे चांद से अपने लिए नहीं, पति की सलामती की दुआ मांगती हैं। अपना घर संस्थापिका डॉ. माधुरी भारद्वाज बताती हैं कि इनमें किसी को पति का चेहरा, किसी को घर का आंगन, तो किसी को शायद कुछ भी नहीं... लेकिन करवा चौथ की चांदनी रात उनके अरमानों के मेले जैसी होती है। अपना घर आश्रम में तैयारियां दो दिन से चल रही हैं। 40 ब्यूटीशियन की टीम 638 महिलाओं के श्रृंगार में जुटी है। किसी के बाल संवारे जा रहे हैं, तो किसी के हाथों में मेहंदी रचाई जा रही है। नेल पेंट, फेशियल, हेयर कट और महावर से उन्हें सजाया जा रहा है। महिलाओं के लिए विशेष व्यंजन तैयार कराए जा रहे हैं।