श्रीसुधासागर सेवा समिति व सकल जैन समाज की ओर से सम्मेद शिखर पहुंचे 585 यात्रियों के दल ने गुनायतन मंदिर में संगीतमय पार्श्वनाथ मंडल विधान किया। श्रीसुधासागर महाराज और श्रीप्रमाण सागर महाराज के सानिध्य में विधान में यात्रियों ने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की। प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी अशोक भैयाजी ने नव देवता पूजन, मूलनायक भगवान पूजन और पारसनाथ विधान पूजन करवाकर अर्घ्य चढ़ाए। सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य फूलचंद, मनोज कुमार, अभिषेक, हार्दिक और अभिनंदन हरसौरा डाबी को मिला। कुबेर इंद्र बनने का सौभाग्य शांतिलाल और प्रकाशचंद नोताड़ा भोपत को व यज्ञ नायक इंद्र बनने का विमलचंद, जयकुमार और राजकुमार जैन सेंठिया मायजा को उच्चतम बोली के माध्यम से प्राप्त हुआ। संगीतकार आयुष जैन एंड पार्टी ने जैन भजनों की प्रस्तुतियां दीं। पांच दिवसीय महाआरती शृंखला के दूसरे दिन दुकरिया परिवार थड़ोद वालों ने महाआरती की। जंबूकुमार, राजेशकुमार, चेतनकुमार, संयम, प्रियांशु, नमन और रिवांश को महाआरती करने का सौभाग्य मिला। महाआरती का जुलूस कुंद-कुंद भवन से शुरू होकर मुख्य बाजार होते हुए बीसपंथी कोठी पहुंचा, जहां भगवान श्रीजी की महाआरती की गई। 24 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि है सम्मेद शिखर जंबूकुमार जैन के अनुसार सम्मेद शिखर जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शामिल है। मान्यता है कि यहां जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया। इसलिए जैन समाज के श्रद्धालुओं के लिए सम्मेद शिखर की यात्रा विशेष धार्मिक महत्व रखती है। झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित इस तीर्थ की यात्रा आत्मशुद्धि, तप और संयम से जुड़ी मानी जाती है। श्रद्धालु पर्वत की पैदल वंदना कर तीर्थंकरों के निर्वाण स्थलों पर श्रद्धा अर्पित करते हैं।