अजमेर पुलिस की एसआईटी ने वीआईपी ट्रेड कंपनी के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने का लालच देकर निवेशकों से करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी करने के मामले में की गई है। आरोपियों ने किशनगढ़ में वीआईपी ट्रेड कंपनी के नाम से फॉरक्स ट्रेडिंग का काम शुरू किया था। निवेशकों और उनके परिचितों व रिश्तेदारों को कंपनी में निवेश के लिए प्रेरित किया गया। इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर सेमिनार आयोजित किए जाते थे। निवेशकों को 8 से 12 प्रतिशत मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपए निवेश करवाए गए। बाद में आरोपी निवेशकों की रकम लेकर फरार हो गए थे। एसपी ने मामले में एसआईटी का गठन किया गया था। इसकी कमान एडिशनल एसपी सिकाऊ प्रियंका कुमावत को सौंपी गई थी। एडिशनल एसपी प्रियंका कुमावत के मुताबिक कंपनी के खिलाफ अजमेर जिले के गांधी नगर और मदनगंज थानों में कुल 40 मामले दर्ज हैं। इन मामलों में अनुसंधान जारी है। कंपनी के खिलाफ अन्य राज्यों में भी प्रकरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। प्रोडक्शन वारंट पर जेल से लाए कंपनी के दोनों डायरेक्टर, जांच जारी एएसपी प्रियंका कुमावत के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने गांधी नगर थाने में दर्ज प्रकरण संख्या 118/2025 में कंपनी के डायरेक्टर लोकेश चौधरी और धीरज गट्टानी को सेंट्रल जेल प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया। इसके अलावा मामले में फरार आरोपी मुख्य टीम लीडर हनुमान छंणग और अब्दुल समद को भी किशनगढ़ से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, लोकेश चौधरी, धीरज गट्टानी और अब्दुल समद को अनुसंधान के बाद न्यायिक अभिरक्षा में भिजवा दिया गया है। हनुमान छंणग से पूछताछ की जा रही है। कॉलोनी काट कर भी लोगों को किया था आकर्षित एएसपी प्रियंका के मुताबिक आरोपियों ने कम कीमत पर खरीदी गई जमीन पर ड्रीम कोटा यार्डा के नाम से कॉलोनी काटी थी। इस कॉलोनी के नाम पर भी निवेशकों को बड़े निवेश के लिए आकर्षित किया गया। वीआरएफएक्स सॉफ्टवेयर और यूएसडीटी के जरिए लोगों को ट्रेडिंग कराते थे आरोपी ट्रेडिंग की प्रक्रिया आसान दिखाने के लिए आरोपियों ने वीआरएफएक्स सॉफ्टवेयर विकसित करवाया था। इसके जरिए यूएसडीटी के जरिए ट्रेडिंग की जाती थी। निवेशकों की रकम को आकर्षक रूप में दिखाने के लिए बाइनेंस वॉलेट ऐप के माध्यम से जमा रकम को यूएसडीटी में प्रदर्शित किया जाता था। एडिशनल एसपी प्रियंका कुमावत के मुताबिक कंपनी में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए जुटाने के बाद आरोपी रकम लेकर फरार हो गए। मामले में निवेशकों की शिकायतों के आधार पर अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए। इस मामले में अभी और भी खुलासों की उम्मीद हैं।