अलवर नगर निगम चुनाव में इस बार वार्ड 7, वार्ड 34 और वार्ड 36 सबसे बड़ी 'हॉट सीट' हैं। इन तीनों वार्डों के प्रत्याशियों की सीधी नजर मेयर की कुर्सी पर है। प्रत्याशी लग्जरी कारों के काफिले निकालकर प्रचार कर रहे हैं। लेकिन वार्ड के लोग कचरे से परेशान हैं। वहीं, एक ही छत के नीचे चुनावी दफ्तर और गुप्त मतदान की रणनीतियों के बीच इन तीनों वार्डों की जनता पानी की किल्लत, बदबू मारते कचरे और खस्ताहाल सड़कों के दर्द से जूझ रही है। वार्ड 34: विधानसभा जैसा लग्जरी प्रचार, सरपंच परिवार की साख दांव पर वार्ड 34 में चुनाव का मिजाज किसी विधानसभा चुनाव से कम नजर नहीं आ रहा। यहां कांग्रेस प्रत्याशी ममता सैनी के कार्यालय के आसपास लग्जरी गाड़ियों प्रचार होता नजर आया। कांग्रेस ने यहां से पूर्व सरपंच गब्बर सैनी की पत्नी ममता सैनी को मैदान में उतारा है। वहीं बीजेपी ने पूजा सैनी को टिकट दिया है। दोनों के बीच मुकाबला है। यह इलाका पहले पंचायत क्षेत्र में आता था, जहां इस बार पहली बार पार्षद पद के लिए मतदान होगा। हालांकि, मूलभूत सुविधाओं के मामले में स्थानीय लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। पानी के लिए जेब खाली: स्थानीय निवासी बनवारी लाल का कहना है कि वार्ड में पानी का विकट संकट है। पीने के पानी के लिए प्रतिमाह 1,000 रुपये का किराया (टैंकर शुल्क) देना पड़ रहा है। लोग पानी की समस्या से बेहद परेशान हैं। इस बार बदलाव के तौर पर कांग्रेस के पक्ष में रुख जता रहे हैं। सड़कों का बुरा हाल: दुकानदार ओमप्रकाश और स्थानीय निवासी केशव प्रसाद चौधरी बताते हैं कि सड़कें पूरी तरह जर्जर हैं। नालियों की सफाई के लिए कोई नहीं आता। स्ट्रीट लाइटें केवल मुख्य रोड तक सीमित हैं। केशव प्रसाद के अनुसार, पूर्व सरपंच के कार्यकाल से लोग संतुष्ट थे, इसलिए उनके परिवार को ही आगे बढ़ाने की मंशा है। वार्ड 36: एक ही जगह दफ्तर, उद्योगपति घरानों की बहुओं में सीधी टक्कर वार्ड 36 का दृश्य काफी दिलचस्प है। यहां दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों कांग्रेस और बीजेपी के चुनावी कार्यालय एक ही जगह पर स्थित हैं। दोनों ही प्रत्याशी नामी बिजनेसमैन परिवारों की बहु हैं। हालांकि, इस 'हाई-प्रोफाइल' मुकाबले के बीच आम जनता जनसुविधाओं के तरस रही है। यहां बीजेपी से अपूर्वा शर्मा और कांग्रेस से रिंकल गर्ग के बीच कांटे का मुकाबला बताया जा रहा है। खतरे का सबब बनते नाले: स्थानीय निवासी राजेंद्र सैनी ने बताया कि पूरे इलाके में पानी और खुले नालों की विकराल समस्या है। नालों के ऊपर ढकाव (पटाव) न होने से हर वक्त बड़े हादसे का डर बना रहता है। सब्जी मंडी आने-जाने वाले लोग रोजाना इस बदहाली से जूझते हैं। अब बदलाव चाहते हैं। बुजुर्गों की बेबसी: मुख्यमंत्री की फोटो वाली छतरी लेकर प्रचार के बीच घूम रहे रिटायर्ड सूबे सिंह कहते हैं कि नेता अपना प्रचार तो जोर-शोर से कर रहे हैं, लेकिन कॉलोनी की कोई सुध लेने वाला नहीं है। सफाई व्यवस्था ठप है और लोग मजबूरी में वोट करने को विवश हैं। वार्ड 7: गुपचुप वोटिंग की रणनीति, पूर्व चेयरमैन अजय अग्रवाल की साख पर दांव वार्ड 7 में चुनावी सरगर्मी काफी शांत लेकिन अंदरूनी तौर पर बेहद रणनीतिक है। यहां बीजेपी समर्थकों की नजरें पूर्व चेयरमैन अजय अग्रवाल के पुराने कार्यकाल पर टिकी हैं और यह सीट उनके राजनीतिक रसूख का इम्तिहान बन गई है। वहीं, स्थानीय लोग बुनियापूदी सुविधाओं को लेकर बेहद गुस्से में हैं। पुराने काम का सहारा: स्कीम नंबर एक में प्रेस की दुकान चलाने वाले राजू का कहना है कि क्षेत्र में कचरा तो रहता है, लेकिन लोग बीजेपी के पक्ष में खुलकर बात कर रहे हैं। इसकी वजह पूर्व चेयरमैन अजय अग्रवाल द्वारा उनके कार्यकाल में कराए गए काम हैं। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी पीयूष जैन बिजनेसमैन है। अंदर ही अंदर सेंध मार रहे हैं। वोटर खुलकर नहीं बोल रहा है। फिर भी मुकाबला कड़ा है। बदबू और बदहाली से घिरी जनता: दूसरी ओर इसी क्षेत्र की महिला पूर्णिमा ने कहा- घर के ठीक सामने कचरे का ढेर लगा रहता है, जिसकी बदबू घर के अंदर तक आती है। रहना दूभर हो गया है। इलाके में पिछले 10 सालों से हर 3 दिन में सिर्फ 1 दिन पानी आता है। वे इस बार बदलाव के मूड में हैं। युवाओं का गुस्सा: युवा मतदाता श्रुति ने अपना आक्रोश जताते हुए कहा कि घर के बाहर पड़े कचरे को वे अब नेताओं के घर के सामने डालने को मजबूर हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि "जो युवाओं की बात नहीं सुनेगा, उसकी लंका लगना तय है।"