पंचायत आम चुनाव के पहले चरण में अलवर जिले की 6 पंचायत समितियों में मतदान को लेकर मतदाताओं में उत्साह नजर आया। शाम 6 बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार, जिला परिषद सदस्यों और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव में कुल 64.82 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। जिले में कुल 5 लाख 57 हजार 259 मतदाताओं में से 3 लाख 62 हजार 1 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का यूज किया। पिछले पंचायत चुनाव में पुराने अलवर जिले में 62.71 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार मतदान प्रतिशत में 2.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दोपहर बाद बढ़ती गई मतदान की रफ्तार सुबह 10 बजे तक जिले में 13.34 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसके बाद दोपहर 1 बजे तक मतदान प्रतिशत बढ़कर 35.60 हो गया। दोपहर 3 बजे तक 50.55 प्रतिशत मतदाता वोट डाल चुके थे। शाम 6 बजे तक यह आंकड़ा 64.82 प्रतिशत पर पहुंच गया। यानी शुरुआती घंटों के मुकाबले दोपहर बाद मतदान की रफ्तार तेज रही और शाम तक करीब 65 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। जिला बदलने से बदला चुनाव का दायरा पिछले पंचायत चुनाव के दौरान अलवर जिले का दायरा बड़ा था। अब खैरथल-तिजारा अलग जिला बन चुका है। इसके अलावा बानसूर और बहरोड़ क्षेत्र को कोटपूतली-बहरोड़ जिले में शामिल किया जा चुका है। ऐसे में दोनों चुनावों के मतदाता आधार और चुनाव क्षेत्र समान नहीं हैं। इसलिए मतदान प्रतिशत की तुलना में 2.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। पिछले चुनाव में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं ने डाला था वोट पुराने अलवर जिले में पिछले पंचायत चुनाव के दौरान कुल 20 लाख 1 हजार 766 मतदाता थे। इनमें 10 लाख 63 हजार 225 पुरुष, 9 लाख 38 हजार 538 महिलाएं और 3 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल थे। उस चुनाव में कुल मतदान 62.71 प्रतिशत रहा था। महिलाओं का मतदान प्रतिशत 64.11 प्रतिशत, जबकि पुरुषों का मतदान प्रतिशत 61.47 प्रतिशत दर्ज किया गया था। यानी पिछले चुनाव में महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में 2.64 प्रतिशत अधिक मतदान किया था। इन 6 पंचायत समितियों में हुआ मतदान जिले की गोविंदगढ़, कठूमर, खेडली-सोंखर, मुबारिकपुर, रामगढ़ और रैणी पंचायत समितियों में मतदान हुआ। अंतिम आंकड़ों के अनुसार, रामगढ़ में सबसे ज्यादा 69.53 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इसके बाद गोविंदगढ़ में 67.12 प्रतिशत, कठूमर में 66.66 प्रतिशत, खेडली-सोंखर में 65.38 प्रतिशत, मुबारिकपुर में 63.66 प्रतिशत और रैणी में 62.42 प्रतिशत मतदान हुआ। इस तरह रामगढ़ पंचायत समिति मतदान प्रतिशत के मामले में सबसे आगे रही, जबकि रैणी में सबसे कम मतदान दर्ज किया गया।