चित्तौड़गढ़ में एनडीपीएस एक्ट का बंदी तय समय पर वापस नहीं लौटा। वह जिला जेल से अंतरिम जमानत पर बाहर गया था। अदालत ने पहले 45 दिन और बाद में 20 दिन की अतिरिक्त राहत मिलने के बाद बंदी को 13 जुलाई की शाम तक जेल में सरेंडर करने को कहा था। ऐसे में बंदी ने सरेंडर नहीं किया। इसके बाद तय समय निकलने के बाद जेल प्रशासन ने उसे फरार मानते हुए कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। इस मामले में पुलिस बंदी की तलाश में जुट गई है। एनडीपीएस एक्ट के तहत जेल में बंद था कोतवाली थाने के ASI नवरंग ने बताया- पंजाब के अमृतसर निवासी रणधीर पुत्र धर्मसिंह निकुंभ थाना क्षेत्र में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में 4 अप्रैल 2025 से चित्तौड़गढ़ जिला जेल में बंद था। उसके खिलाफ निकुंभ थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज था। यह प्रकरण बड़ीसादड़ी स्थित एनडीपीएस मामलों की विशेष अदालत में विचाराधीन है। इसी दौरान बंदी ने राजस्थान हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत के लिए आवेदन किया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उसे 11 मई से 24 जून तक 45 दिन की अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था। तय तारीख पर नहीं पहुंचा बंदी कोतवाली थाने के ASI नवरंग ने बताया- 45 दिन की अंतरिम जमानत पूरी होने से पहले बंदी ने फिर से राहत मांगी। इस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने उसकी अंतरिम जमानत 20 दिन और बढ़ा दी। अदालत के आदेश के अनुसार उसे 24 जून से 13 जुलाई तक अतिरिक्त राहत दी गई थी। साथ ही स्पष्ट शर्त रखी गई थी कि जमानत पर जाते और लौटते समय वह पंजाब के होशियारपुर जिले के टांडा थाने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराए और 13 जुलाई को शाम 5 बजे से पहले चित्तौड़गढ़ जिला जेल में आकर सरेंडर करेगा। लेकिन निर्धारित समय तक वह जेल नहीं पहुंचा और न ही उसने कोई सूचना दी। इसके बाद जेल प्रशासन ने उसे फरार मानते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। तलाश में जुटी पुलिस जेल प्रशासन की ओर से जेल प्रहरी वेदराम ने कोतवाली थाने में लिखित रिपोर्ट देकर बंदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। रिपोर्ट में अदालत के आदेश, जेल रिकॉर्ड और जमानत से जुड़ी सभी जानकारी पुलिस को सौंपी गई है। साथ ही पुलिस से फरार बंदी को गिरफ्तार कर दोबारा जेल भेजने की मांग की गई है। इस संबंध में राजस्थान हाईकोर्ट, होशियारपुर पुलिस, टांडा थाना और निकुंभ थाना को भी सूचना भेजी गई है। अब कोतवाली पुलिस मामले की जांच कर रही है और बंदी की तलाश शुरू कर दी गई है।