आंखों का इलाज करने वाले डॉक्टर्स-एसोसिएशन और सीजीएचएस (सेंट्रल गर्वनमेंट हेल्थ स्कीम) के बीच एक इंजेक्शन को लेकर तनातनी हो गई है। एक ओर सीजीएचएस जहां इंजेक्शन (एफ्लिबर्सेप्ट) को इस्तेमाल करने के लिए कह रहा है वहीं देश के नेत्र रोग विशेषज्ञों ने इसे इस्तेमाल नहीं करने के लिए कहा है। डॉक्टर्स का कहना है कि इस इंजेक्शन से आंखों में इंफेक्शन होने से लेकर रोशनी जाने तक का खतरा बना हुआ है। ऐसे में इसे नहीं लगाया जा सकता। वहीं अब सीजीएचएस ने चेतावनी दी है कि यदि इंजेक्शन को काम में नहीं लिया जाता है तो अस्पतालों पर कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन डॉक्टर्स ने तय किया है कि वे इसलिए भी इंजेक्शन नहीं लगाएंगे क्योंकि यदि किसी पेशेंट को परेशानी होती है तो उसकी जिम्मेदारी सीधे डॉक्टर पर आती है। कंपनी ने इंजेक्शन के दो बैच वापस मंगाए मरीजों में इंजेक्शन (एफ्लिबर्सेप्ट) के लगाने के बाद उन्हें आंखों में सूजन की लगातार शिकायतें सामने आईं। विट्रो रेटिनल सोसायटी ऑफ इंडिया और राजस्थान ऑप्थेल्मोलॉजिकल सोसाइटी ने भी इस संदर्भ में डॉक्टरों को अलर्ट किया और बताया कि इस इंजेक्शन के कुछ बैच लगने के बाद मरीजों की आंखों में सूजन और अन्य परेशानियों होना सामने आया है। देशभर में इस इंजेक्शन के लगने के बाद इंफेक्शन होने और तबीयत खराब होने के अब तक 5 केस सामने आ चुके हैं। इनमें 4 मरीज दवाओं से ठीक हुए जबकि 1 मरीज की सर्जरी करनी पड़ी। ज्यादातर शिकायतें बैच नंबर BA00111A से जुड़ी होना सामने आया। शुरुआत में कंपनी ने BA00111A बैच की गुणवत्ता सही बताई थी, लेकिन विवाद बढ़ने पर कंपनी ने एहतियात के तौर पर BA00110A और BA00111A दोनों बैच मार्केट से वापस ले लिए। कंपनी ने इन बैच की जगह नया बैच BA00112A जारी कर दिया। लेकिन अस्पतालों ने किसी भी तरह के बैच के इंजेक्शन लगाने से मना कर दिया। लेकिन इसके बाद सीजीएचएस के जयपुर के अपर निदेशक डॉ. राम शंकर रावत ने सभी अस्पतालों को पत्र लिखकर पूछा है कि आखिर वे नए बैच BA00112A को क्यों नहीं लगा रहे।