दशहरा मैदान में हर साल आयोजित होने वाले प्रसिद्ध मेले को लेकर इस बार छोटे दुकानदारों और ठेला-रेहड़ी व्यापारियों में भारी गुस्सा और अनिश्चितता का माहौल है। सालों से मेले में फास्ट फूड और अन्य दुकानें लगाने वाले करीब 50 से ज्यादा छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। व्यापारियों ने निगम प्रशासन और अधिकारियों पर ब्लैक में दुकानें बेचने का आरोप लगाया है। मेले में सालों से काम करने वाले तेजमल गुप्ता ने बताया कि हम सालों से यहां दुकानें लगाते आ रहे हैं। हम सब दुकानदारों का सबका फास्ट फूड, चाट का मार्केट होता है। 15 दिन से दफ्तरों के चक्कर काट रहे तेजमल गुप्ता ने कहा कि वह निगम और संबंधित अधिकारियों के पास आवंटन और रसीद कटवाने के लिए करीब 15 दिन से चक्कर काट रहे हैं। उन्हें एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भटकाया जा रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। हमसे कहा जाता है कि एफिडेविट बनवाकर लाओ, लेकिन रसीद या चालान नहीं काटा जा रहा। अगर चालान ही नहीं मिलेगा तो हम मेले की तैयारी कैसे करेंगे। व्यापारी पूनम देवी ने भी अपनी रसीदें और दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि मेरे पास पुराने सालों की रसीदें बतौर सबूत मौजूद हैं। हम लगातार जनप्रतिनिधियों से लेकर निगम दफ्तर तक चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हर बार सिर्फ टालमटोल किया जा रहा है। दुकानों की ब्लैक मार्केटिंग का आरोप दशहरा मैदान (रावण चौक) में दुकान लगाने पहुंची व्यवसायी कविता ने प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए बड़ा आरोप लगाया। कविता ने कहा कि हमें अभी तक दुकान लगाने की जगह तय करके रसीद नहीं दी गई है। हमें कभी इधर तो कभी उधर भेजा जा रहा है। एक-एक व्यक्ति को 15-15 दुकानें अलॉट की हमें अंदेशा है कि दुकानें ब्लैक में बेची जा रही है। एक व्यक्ति को पंद्रह पंद्रह जगह दी जा रही है और वह बाद में ज्यादा रेट पर दुकानदारों को दुकाने देंगे। मेले में लगभग 50 से अधिक छोटे व्यापारी ऐसे हैं, जिनकी रोजी-रोटी का मुख्य जरिया यह वार्षिक मेला ही है। त्योहार और मेले के ऐन वक्त पर दुकानें अलॉट न होने से इन दुकानदारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। व्यापारियों की मांग है कि प्रशासन तुरंत पारदर्शिता बरतते हुए उनकी रसीद और चालान काटे, ताकि वे समय पर अपनी दुकानें लगाकर अपना जीवनयापन कर सकें।