उदयसिंहोत परिवार की ओर से दाता मूलचंद की प्रोल में दो दिवसीय बाईसा-भुआसा संगम समारोह का आयोजन हुआ। इसमें झिनझिनयाली, कुंडा, बईया, सिहड़ार, भाडली एवं देवड़ा सहित छह गांवों की 571 बाईसाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समारोह में परंपरा, संस्कार और पारिवारिक एकजुटता का अनूठा संगम दिखा। कार्यकर्ता महिपालसिंह कुंडा ने बताया कि पहले दिन स्वागत के बाद भजन संध्या आयोजित हुई। भजन गायक सेनीदान नेड़ान ने देवीय स्तुतियों से भक्ति रस घोला, वहीं पारंपरिक नृत्यों ने समां बांधा। दूसरे दिन कलश यात्रा निकाली गई, जो अलेखपुरी मठ होते हुए संत राजऋषि दाता मूलचंद चौराहे पहुंची। मूर्ति दर्शन के बाद यात्रा प्रोल में संपन्न हुई। सजे-धजे ऊंट-घोड़े आकर्षण का केंद्र रहे और ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर बहन-बेटियों का स्वागत किया। संस्कार निर्माण व पारिवारिक मूल्यों पर हुई बौद्धिक चर्चा प्रोल में आयोजित सत्र में पूर्व सरपंच गोरधनसिंह कुंडा ने झिनझिनयाली की स्थापना, पूर्वजों के योगदान व जीवन आदर्शों पर प्रकाश डाला। तारेंद्रसिंह झिनझिनयाली ने संस्कार निर्माण पर जोर देते हुए बहन-बेटियों से क्षत्रिय युवक संघ के शिविरों से जुड़ने का आह्वान किया। इसके बाद पारंपरिक खेल आयोजित हुए। अंत में सभी बाईसाओं को स्मृति चिह्न भेंट कर विदाई दी गई। आयोजन को सफल बनाने में सूरज कंवर भाटी, पूनम कंवर, नींबसिंह, शंभुसिंह, गुलाबसिंह, समुन्द्रसिंह, चंद्रवीरसिंह, विक्रमसिंह, तारेंद्रसिंह, पहलादसिंह, खेतसिंह, जसवंतसिंह सहित कई युवाओं का सहयोग रहा। समारोह में 6 गांवों के प्रबुद्धजन व परिवारजन उपस्थित रहे।