प्रतापगढ़ | मानगढ़ धाम जिला बांसवाड़ा को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद और वनवासी कल्याण आश्रम ने ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान खींचा गया। ज्ञापन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राजस्थान के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित रहा। जिला कलेक्टर के माध्यम से मांग रखी गई। मानगढ़ धाम को अविलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए। इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण और विकास सुनिश्चित किया जाए। ज्ञापन में कहा गया कि स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज का योगदान अहम रहा। गोविंद गुरु के नेतृत्व में चले भगत आंदोलन ने समाज में जागृति लाई। सामाजिक सुधार का संदेश दिया। स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ पहाड़ी पर अंग्रेजी शासन की गोलीबारी में बड़ी संख्या में जनजातीय महिला, पुरुष और बाल आंदोलनकारियों ने जान दी। इसे स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का मार्मिक और महत्वपूर्ण अध्याय बताया गया। ज्ञापन के अनुसार भगत आंदोलन जनजातीय समाज की अस्मिता की रक्षा का आंदोलन था। सामंती शोषण के विरोध का आंदोलन था। अन्यायपूर्ण औपनिवेशिक व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन था। बताया गया कि मानगढ़ का बलिदान राजस्थान तक सीमित नहीं। गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित देश के जनजातीय समाज की साझा ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। इस बलिदान ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ स्वतंत्रता की चेतना को और प्रखर किया। संगठन ने ज्ञापन में यह भी लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2022 को मानगढ़ धाम यात्रा के दौरान इसे राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के वीर, देशभक्त और स्वाभिमानी समाज की साझा राष्ट्रीय विरासत बताया था। राष्ट्रपति 4 अक्टूबर 2024 को मानगढ़ धाम पहुंची थीं। जनजातीय बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी।