धौलपुर जिले की पारंपरिक लोक संस्कृति से जुड़ी टेसू-झेंझी की परंपरा को लेकर धौलपुर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर में टेसू और झेंझी बनाने का काम जोर-शोर से चल रहा है। वहीं, बाजारों में जगह-जगह इनकी बिक्री भी होने लगी है। बाजारों में सजे टेसू-झेंझी लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत की याद दिला रहे हैं। टेसू-झेंझी का पर्व बच्चों के उत्साह और लोकगीतों की मधुर परंपरा से जुड़ा हुआ है। इस अवसर पर बच्चे टेसू और झेंझी लेकर घर-घर जाते हैं और पारंपरिक लोकगीत गाकर लोगों का मनोरंजन करते हैं। इस परंपरा में लोकजीवन की सादगी, आपसी मेलजोल और सांस्कृतिक उल्लास की झलक देखने को मिलती है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया जाता है। लोक संस्कृति को सहेजने का माध्यम आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव के बावजूद टेसू-झेंझी जैसी परंपराएं आज भी लोक संस्कृति को जीवंत बनाए हुए हैं। इनके निर्माण और बिक्री से स्थानीय कारीगरों को रोजगार मिलता है। साथ ही, पारंपरिक वस्तुओं के प्रति लोगों की रुचि भी बनी रहती है। यह परंपरा बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। घर-घर जाकर लोकगीत गाने और टेसू-झेंझी के साथ उत्सव मनाने से नई पीढ़ी को पुराने रीति-रिवाजों और लोक परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिलता है। धौलपुर के बाजारों में टेसू-झेंझी की बढ़ती मौजूदगी से एक बार फिर पारंपरिक लोक संस्कृति की रंगत दिखाई देने लगी है।