राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर रविवार को शहर में अभ्युदय पथ संचलन में अनुशासन और एकजुटता का नजारा देखने को मिला। सफेद शर्ट, खाकी पेंट और सिर पर काली टोपी पहने हाथों में दंड लेकर निकले स्वयंसेवकों की कदमताल और घोष की धुनों ने लोगों को आकर्षित किया। शहर के तीन अलग-अलग रास्तों से निकले पथ संचलन का तहसील चौराहे पर संगम हुआ तो भारत माता के जयकारे गूंज उठे। लोगों ने फूल बरसाकर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। संघ की ओर से शास्त्री कॉलोनी रोड, कलेक्ट्री रोड और नवाडेरा रोड से पथ संचलन निकाला गया। तीनों रास्तों से घोष की धुन पर कदम मिलाते हुए स्वयंसेवक तहसील चौराहे पर पहुंचे। यहां तीनों संचलनों के एक साथ मिलने का नजारा देखने के लिए लोग जुटे रहे। संगम के दौरान लोगों ने फूल बरसाए और भारत माता के जयकारे लगाकर स्वागत किया। इसके बाद एक साथ आगे बढ़ा पथ संचलन गेपसागर की पाल से होते हुए पुराने शहर की सड़कों और गलियों से गुजरा। रास्ते में कई जगह लोगों ने स्वयंसेवकों का स्वागत किया। शहर में कदमताल करते हुए संचलन वापस तहसील चौराहे पहुंचा और वहां से लक्ष्मण मैदान पहुंचकर संपन्न हुआ। अनुशासन और सामाजिक एकता का दिया संदेश लक्ष्मण मैदान में आयोजित बौद्धिक कार्यक्रम में वक्ताओं ने देशभक्ति, अनुशासन, संगठन और सामाजिक एकता के महत्व पर जोर दिया। शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस पथ संचलन में स्वयंसेवकों की एक जैसी गणवेश और घोष की धुन पर एक साथ कदमताल आकर्षण का केंद्र रही।