पंचायत चुनाव को लेकर बिलाड़ा क्षेत्र में सियासी पारा चढ़ने लगा है। चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशी जहां जातीय समीकरणों को साधने और विकास के नए दावों के साथ मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं, वहीं पूर्व जनप्रतिनिधियों के खट्टे-मीठे अनुभव पंचायत राज की जमीनी हकीकत बयां कर रहे हैं। बिलाड़ा पंचायत समिति के पूर्व प्रधान अमराराम मेघवाल का राजनीतिक सफर भी कई दिलचस्प और प्रेरणादायक किस्सों से भरा है। 10 हजार के खर्च में जीता था पहला चुनाव 57 वर्षीय अमराराम मेघवाल ने बताया कि वर्ष 1995 में स्नातक की पढ़ाई के दौरान 25 साल की उम्र में उन्होंने राजनीति में पहला कदम रखा था। उन्होंने भाजपा के टिकट पर पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ा। उस दौर में उनके क्षेत्र में कांग्रेस का मजबूत दबदबा हुआ करता था, लेकिन उन्होंने महज 10 हजार रुपए के बजट, नुक्कड़ सभाओं और मतदाताओं से सीधे संवाद के दम पर पहली बार जीत दर्ज की। इसके बाद वर्ष 1997 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए वे निर्दलीय प्रधान चुने गए। प्रधान बनने के बाद पीपाड़ में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कहने पर वे कांग्रेस में शामिल हो गए थे।