विदेश से एमबीबीएस करने के बाद भारत में डॉक्टर बनने के लिए जरूरी एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा में तीन बार फेल हुए युवक ने 22 लाख रुपए देकर फर्जी सर्टिफिकेट खरीद लिया। इसी के आधार पर दौसा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप भी शुरू कर दी। एसओजी ने फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट मामले में आरोपी राकेश कुमार यादव (32) निवासी बानसूर, कोटपूतली-बहरोड़ को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने 2011 में 12वीं करने के बाद जयपुर से चार साल का जीएनएम नर्सिंग कोर्स किया था। इसके बाद 2017 में एमबीबीएस करने ताजिकिस्तान गया और 2022 में भारत लौटा। एसओजी की जांच के अनुसार, राकेश यादव ने दिसंबर 2022, जून 2023 और दिसंबर 2023 में एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा दी, लेकिन तीनों बार फेल हो गया। इसके बाद उसने अलवर के नफीस खान और दौसा के शुभम गुर्जर से 22 लाख रुपए में फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट बनवाया। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर दौसा के पं. नवल किशोर शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप हासिल कर ली। हालांकि, एसओजी की कार्रवाई की भनक लगते ही वह फरार हो गया। 100 से अधिक लोग रडार पर, अब तक 38 गिरफ्तार; एसओजी के डीआईजी भुवन भूषण यादव और अनुसंधान अधिकारी जितेन्द्र नावरिया के नेतृत्व में आरोपी राकेश को 26 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अधीक्षक सतनाम सिंह ने बताया कि फर्जी सर्टिफिकेट मामले में अब तक 100 से अधिक लोगों को चिह्नित किया गया है। मुख्य सरगना भानाराम माली और राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा सहित 37 आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। राकेश की गिरफ्तारी के साथ यह संख्या 38 हो गई है। 20 से 30 लाख लेकर बनवाते थे प्रमाण पत्र, आरएमसी अधिकारियों की मिलीभगत एसओजी की जांच में सामने आया कि गिरोह विदेश से एमबीबीएस कर लौटे और एफएमजी परीक्षा में फेल हुए छात्रों से प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपए लेकर फर्जी सर्टिफिकेट उपलब्ध कराता था। आरोप है कि आरएमसी के भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से इन छात्रों को राजस्थान के अस्पतालों में इंटर्नशिप भी दिलवाई जाती थी। पुलिस अब फरार नफीस खान की तलाश कर रही है, जिसने खुद भी फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर इंटर्नशिप की थी।