विजयादशमी पर शहर के मंदिरों में सुबह शस्त्र पूजन और हवन हुए। मेहरानगढ़ स्थित चामुंडा माता मंदिर में हवन की पूर्णाहुति के साथ पूजन किया गया। पूर्व महाराजा गजसिंह और हेमलता राज्ये ने पूजा-अर्चना कर मारवाड़ की सुख-समृद्धि की कामना की। मंडोर के दो हजार साल पुराने चामुंडा माता मंदिर में भी वैदिक परंपरा से शस्त्र पूजन हुआ। शाम को बालाजी मंदिरों में सुंदरकांड पाठ हुए। दवे गोधा परिवार ने रावण के निधन पर शोक व्यक्त कर स्नान और जनेऊ बदलने की परंपरा निभाई। मंडोर में निकाली विजय यात्रा विजयादशमी पर मंडोर के प्राचीन चामुंडा माता मंदिर में वैदिक परंपरा के अनुसार शस्त्र पूजन हुआ। विशाल सिंह चाम्पावत ने बताया कि मंदिर पुजारी अरविंद मिश्रा के सान्निध्य में पूजन किया गया। महावीर सिंह बस्तवा ने बताया कि पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने धर्म-ध्वजा के साथ पैदल विजय यात्रा निकाली और धर्म का जयघोष किया। शैतान सिंह, सज्जन सिंह भूंगरा, भूपेंद्र सिंह, प्रांशु अग्रवाल, कुंदन सिंह, युवराज सिंह, मगन सिंह, करणी सिंह, कवराज सिंह, नाहर सिंह सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे। रावण दहन के बाद परिवार ने रखा सूतक मेहरानगढ़ में हवन की पूर्णाहुति, शस्त्र पूजन मेहरानगढ़ स्थित चामुंडा माता मंदिर में पूर्व राजपरिवार की ओर से हवन की पूर्णाहुति की गई। पूर्व महाराजा गजसिंह और हेमलता राज्ये ने पूजा-अर्चना की। फिर गजसिंह की तिलक आरती हुई। ललित कुमार त्रिवेदी, जितेंद्र राज जोशी, अश्विनी कुमार दवे, अश्वनी कुमार त्रिवेदी, भगवान सिंह राजपुरोहित, सुरेश व्यास और घनश्याम त्रिवेदी ने विधिवत पूजन करवाया। मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के प्रशासनिक अधिकारी कर्नल अजय सिंह शेखावत ने बताया कि पूर्व राजपरिवार ने मुरली मनोहर मंदिर में भगवान श्रीरामचंद्र की तस्वीर के समक्ष पूजा-अर्चना की। शस्त्र पूजन और शमी (खेजड़ी) पूजन किया गया। फिर रामचंद्रजी की सवारी रवाना हुई। शहर के कई क्षेत्रों में आरएसएस की ओर से पथ संचलन भी निकाले गए। विजयादशमी की शाम चांदपोल स्थित अमरनाथ महादेव मंदिर में दवे गोधा परिवार ने परंपरा निभाई। पंडित कमलेश अजय दवे ने बताया कि रावण दहन के बाद परिवार ने सूतक रखा और स्नान किया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जनेऊ बदली गई और रावण के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। रावण की प्रतिमा के समक्ष अभिषेक कर खीच-पुड़ी का भोग भी लगाया गया।