बगड़ के आदर्श नगर संचालित मां सेवा संस्थान के विमंदित एवं पुनर्वास गृह की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। ये पहली बार नहीं उठे हैं। वर्ष 2017 में तत्कालीन कलेक्टर ने गृह बंद करने की सिफारिश की थी। वर्ष 2024 में भी तत्कालीन कलेक्टर ने गंभीर शिकायतों के बाद कार्रवाई के लिए पत्र लिखा। इसके बावजूद गृह का संचालन जारी रहा। अब एक बार फिर जांच में स्टाफ, साफ-सफाई, भोजन, दवाइयों और सुरक्षा व्यवस्था में खामियां सामने आई हैं। विभाग ने नोटिस दिया। जवाब नहीं मिलने पर अप्रैल से सितंबर तक का अनुदान रोकना पड़ा। करीब 64 लाख रुपए सालाना सरकारी सहायता लेने वाले इस गृह में पिछले दिनों एक विमंदित युवती से कथित दुष्कर्म, मारपीट और प्रताड़ना के आरोपों को लेकर मामला दर्ज होने के बाद प्रशासन ने जांच कराई। कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग के निर्देश पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की चार सदस्यीय टीम ने निरीक्षण किया। जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां दर्ज करते हुए कार्रवाई की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट कलेक्टर और संबंधित विभागीय अधिकारियों को भेजी गई है। 33 कर्मचारियों के मानक के मुकाबले मौके पर 6-7 लोग, प्रयाप्त शौचालय भी नहीं जांच के दौरान गृह में बुनियादी सुविधाओं से लेकर सुरक्षा और स्टाफ तक में कमियां मिलीं। करीब 50 लोगों की क्षमता वाले गृह में पर्याप्त शौचालय नहीं थे। साफ-सफाई संतोषजनक नहीं मिली और बच्चों की यूनिफॉर्म की स्थिति भी ठीक नहीं थी। रसोईघर में निर्धारित मानकों के अनुरूप व्यवस्थाओं का अभाव मिला। डाइनिंग रूम सहित अन्य जरूरी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं थीं। सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे बंद मिले। दवाइयों की उपलब्धता और स्टाफ के बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़ी व्यवस्था भी नहीं मिली। निर्धारित मानक के अनुसार 33 कर्मचारियों की जरूरत बताई गई, जबकि निरीक्षण के समय मौके पर केवल छह-सात लोग ही मिले। टीम को संचालन से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए। मां सेवा संस्थान की अध्यक्ष डॉ. इंदू सैनी का कहना है कि पिछले दिनों जिला स्तरीय टीम ने निरीक्षण किया था। टीम ने सजेशन दिया था कि वॉशरूम की संख्या बढ़ाई जाए। उसको हम दुरुस्त करवा रहे हैं। जो भी कमियां बताई जाएंगी उसे ठीक किया जाएगा। आयुक्त एवं विशेष सचिव दिव्यांगजन विभाग, इकबाल खान का कहना है कि मां सेवा संस्थान की और से आदर्शनगर बगड़ में संचालित पुनर्वास गृह की जांच कराई गई है। जांच रिपोर्ट मिल चुकी है। जांच में खामियां पाई गई है। जल्द ही कार्यवाही की जाएगी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक अरविंद ओला ने बताया कि विमंदित गृह की जांच की गई थी। प्रारंभिक तौर पर कई गंभीर खामियां मिली हैं। जांच के दौरान संचालनकर्ता की ओर से कई आवश्यक दस्तावेज नहीं दिखाए गए। जांच के बाद तथ्यात्मक रिपोर्ट कलेक्टर और आयुक्तालय निशक्तजन को भेजी गई है। 64 लाख सालाना सहायता, व्यवस्थाओं पर सवाल गृह को करीब 64 लाख रुपए सालाना सरकारी सहायता मिलती है। इसके बावजूद मौजूदा जांच में बुनियादी सुविधाओं, स्टाफ, दवाइयों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कमियां सामने आई हैं। विभाग ने अप्रैल से सितंबर तक की दो तिमाहियों का अनुदान रोकने की पुष्टि की है। पूर्व में यहां रहने वाले एक विमंदित युवक को बीडीके अस्पताल लाया गया था। उस मामले में जिंदा व्यक्ति को मृत बताकर पोस्टमार्टम कराने और अंत्येष्टि की तैयारी करने का मामला सामने आया था।