आरक्षण के बूते पर महिलाएं कागजों पर सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुख बन गईं, लेकिन जयपुर, टोंक में जिला परिषद, पंचायत समितियों, पंचायतों की असली सरकार परदे के पीछे से चलती है। पंचायतीराज संस्था की सबसे बड़ी इकाई जिला परिषद है। टोंक में इसकी मुखिया महिला है और सारा काम ही पति संभाल रहा। भास्कर की महिला रिपोर्ट ने अपनी पड़ताल में देखा कि निमोड़िया- देहलाना समेत कई पंचायतों की दीवारों पर फोन नंबर तक पति या अन्य परिजनों के लिखे हुए हैं। यहां तक कि अधिकारियों तक को सीधे दिशा-निर्देश वे ही देते हैं। जिला प्रमुख आवास के बाहर से थड़ियां तक नहीं हट सकीं टोंक की जिला प्रमुख सरोज बंसल के सरकारी निवास के बाहर चाय की थड़ी वाला बोला कि ‘साहब’ (प्रमुख के पति) तो बाहर गए हैं। सरोज ने स्वीकार किया कि शुरुआत में मुझे झिझक रहती थी। पहले साल पति नरेश बंसल साथ रहे। हालांकि, उनके सरकारी आवास के बाहर ही अवैध थड़ियां लगी हैं। कार्यकाल पूरा हो गया लेकिन वे अवैध रूप से लगी इन थड़ियों को हटवा नहीं सकीं। आवास के बाहर नेमप्लेट पर नाम सरोज नरेश बंसल लिखा है। सरोज ने यह पहल जरूर की है कि अब जिला परिषद में जो अल्पाहार आता है वह मोटा अनाज का होता है। बाजरा के मीनू या मूंगफली आती है। परिसर को प्लास्टिक-मुक्त बनाया। अलीगढ़ प्रधान फूलबाई अनपढ़, काम संभाला ससुर-देवर ने देहलाना : मनीषा शर्मा सरपंच हैं। पति लालचंद सरकारी शिक्षक हैं, लेकिन पंचायत से जुड़े फैसले वे ही लेते हैं और अपने छोटे भाई बाबूलाल को बताते हैं। पंचायत के शौचालय की हालत दयनीय है। गेंदीलाल (चाय की थड़ी वाले) बताते हैं कि नया पीएचसी बन गया, लेकिन स्टाफ नहीं बैठता।
खरेड़ा (टोडारायसिंह): सरपंच गायत्रीदेवी शर्मा के पति का पिछले साल निधन हो गया। जिस चारागाह में पौधरोपण होना था, वहां तारबंदी ही नहीं हुई। ऑफिस के सूचना बोर्ड पर जंग आ गया। निमोडिया (चाकसू): 34 वर्षीय सरपंच पलक जैन एमकॉम तक पढ़ी हैं। अधिकारियों तक के पास फोन नंबर उनके पति अमित जैन के हैं। कार्यालय के बाहर और बोर्ड पर भी नंबर उनके ही लिखे हैं। खेड़ा रानीवास (जयपुर): श्यामा शर्मा निर्विरोध सरपंच बनी थीं। लेकिन, पंचायत के फैसले पति ही करते हैं। टीम उनके घर पहुंची, तब भी घूंघट में बैठी श्यामा पति का मिल्क सेंटर संभाल रही थीं। सरपंच के लिए पूछा तो बताया ‘वे’ अभी सो रहे हैं। लक्ष्मीपुरा धाकड़ान की दो बार सरपंच चुनी गईं ममता सैनी का चयन आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर हो गया। जेठ हेमराज ने कहा मैं काम संभालता हूं। मुझसे बात करें। पंचायत के गेट पर कपड़े सुखे हुए थे। 2017 में रिटायर्ड सचिव रामकरण का नाम लिखा दिखा।
टोडारायसिंह : 60 वर्षीय प्रधान सीता देवी हैं। स्टाफ और विकास अधिकारी कहते हैं कि प्रशासनिक कामकाज सीता के भाई, पूर्व सरपंच रामचंद्र गुर्जर संभालते हैं।
अलीगढ़: प्रधान फूलबाई पढ़ी-लिखी नहीं हैं। कामकाज देवर राकेश और ससुर गुलाबचंद मीणा संभालते हैं। कार्यालय पर भी ससुर के ही नंबर लिखे हुए हैं।