जयपुर अपनी स्थापना के 300 साल पूरे करने जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए जयपुर के पूर्व राजपरिवार की ओर से दो साल तक कई आयोजन किए जाएंगे। इसके साथ ही जयपुर और ढूंढाड़ के इतिहास, कला, स्थापत्य और संस्कृति पर गहन अध्ययन को प्रोत्साहित करने के लिए ढूंढाड़ रिसर्च सेंटर की शुरुआत की जाएगी। जयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य सवाई पद्मनाभ सिंह ने सिटी पैलेस में बताया कि 18 नवंबर 2026 से 18 नवंबर 2027 तक जयपुर के 300 साल पूरे होने के उत्सव को विशेष रूप से मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जयपुर की स्थापना और इसके विकास की यात्रा को याद करने के साथ ही यह सोचने की जरूरत है कि आने वाले 300 सालों में शहर की पहचान और विरासत को किस तरह आगे बढ़ाया जाए। इस उत्सव का उद्देश्य इसी दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करना है। सवाई जय सिंह और जयपुर की विरासत को याद करने का प्रयास सवाई पद्मनाभ सिंह ने कहा कि जयपुर का 300वां स्थापना वर्ष राजपरिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसे केवल एक साल के आयोजन तक सीमित रखने के बजाय दो साल तक उत्सव के रूप में मनाने की योजना है। इसमें आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ साहित्य, प्रकाशन और शोध से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के माध्यम से जयपुर के संस्थापक सवाई जय सिंह द्वितीय के योगदान और शहर की ऐतिहासिक यात्रा को नए सिरे से सामने लाने का प्रयास होगा। उन्होंने कहा कि जयपुर की अपनी विशिष्ट पहचान है और दुनिया में इस तरह की ऐतिहासिक नगरी का उदाहरण मिलना मुश्किल है। ऐसे में शहर के 300 साल पूरे होने का उत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाना जरूरी है। यह अवसर जयपुर की उपलब्धियों को याद करने के साथ उसकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का भी है। ढूंढाड़ रिसर्च सेंटर से शोधकर्ताओं को मिलेगा अवसर जयपुर के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत पर अकादमिक शोध को बढ़ावा देने के लिए राजपरिवार की ओर से ढूंढाड़ रिसर्च सेंटर शुरू करने की योजना बनाई गई है। इस केंद्र के माध्यम से देश और विदेश के उन शोधकर्ताओं को जुड़ने का अवसर मिलेगा, जो जयपुर या ढूंढाड़ क्षेत्र के इतिहास और विरासत पर अध्ययन करना चाहते हैं। शोध का दायरा केवल इतिहास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थापत्य कला, कला एवं शिल्प और अन्य संबंधित विषयों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। राजपरिवार के पोथीखाने की पांडुलिपियां भी होंगी उपलब्ध इस पहल की खास बात यह है कि जयपुर राजपरिवार के पोथीखाने में मौजूद पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों को भी शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराने की योजना है। ये दस्तावेज जयपुर और ढूंढाड़ के इतिहास, कला, संस्कृति और राजपरिवार से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण स्रोत साबित हो सकते हैं। पद्मनाभ सिंह ने बताया कि जो भी स्कॉलर जयपुर या ढूंढाड़ पर शोध करना चाहते हैं, उन्हें इस पहल से जुड़ने का अवसर दिया जाएगा। राजपरिवार के पास उपलब्ध ऐतिहासिक सामग्री तक शोधकर्ताओं की पहुंच बनाने से उन विषयों पर भी अध्ययन संभव हो सकेगा, जिन पर अब तक पर्याप्त काम नहीं हुआ है। इससे शहर के इतिहास से संबंधित दस्तावेजों के अध्ययन और उनके व्यवस्थित उपयोग को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। शोध के लिए फेलोशिप देने की भी तैयारी ढूंढाड़ रिसर्च सेंटर के साथ शोधकर्ताओं की मदद के लिए फेलोशिप शुरू करने की भी योजना है। इसके तहत जयपुर आकर यहां की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत पर काम करने वाले शोधार्थियों को सहयोग दिया जाएगा। इसका लाभ देशी और विदेशी, दोनों तरह के विद्वानों को मिल सकेगा। यह पहल विशेष रूप से उन शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी हो सकती है, जो जयपुर की स्थापत्य परंपरा, ऐतिहासिक इमारतों, कला एवं शिल्प, सांस्कृतिक जीवन और ढूंढाड़ क्षेत्र के इतिहास पर गहराई से अध्ययन करना चाहते हैं। रिसर्च सेंटर और फेलोशिप के जरिए जयपुर की विरासत को संरक्षित करने के साथ उससे जुड़े ज्ञान को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। --- ये खबर भी पढ़िए- जयपुर में कैलाश खेर-अमीश त्रिपाठी को मिला अवॉर्ड:सवाई भवानी सिंह की जयंती पर सिटी पैलेस में दिए गए ‘सवाई जयपुर अवॉर्ड्स-2026’ जयपुर के 300 साल पूरे होने से पहले एक साल तक जश्न मनाने के कार्यक्रम के तहत 25 कैटेगरी में अलग-अलग विभूतियों को अवार्ड दिए गए। (पढ़िए पूरी खबर)