जयपुर एयरपोर्ट पर गुरुवार को मशहूर सिंगर कैलाश खेर और फिल्म डायरेक्टर फराह खान नजर आए। कैलाश खेर सिटी पैलेस में आयोजित एक अवॉर्ड सेरेमनी में हिस्सा लेने के लिए जयपुर आए हैं, जहां उन्हें सम्मानित किया जाएगा। वहीं फराह खान जयपुर में एक कार्यक्रम में शरीक होने आई हैं। फराह खान एयरपोर्ट से सीधे होटल के लिए रवाना हो गई। फराह खान ने कोरियोग्राफर के रूप में अपनी पहचान बनाने के बाद फिल्म निर्देशन में भी सफलता हासिल की है। दोनों सितारों का जयपुर से पहले भी जुड़ाव रहा है। कैलाश खेर अपनी दमदार आवाज और सूफी संगीत के लिए पहचाने जाते हैं। वे जयपुर में कई बार लाइव परफॉर्मेंस दे चुके हैं। एयरपोर्ट से बाहर निकलते हुए दोनों सितारे … ‘अल्लाह के बंदे’ से मिली पहचान, सूफी संगीत को बनाया खास अंदाज कैलाश खेर हिंदी फिल्म संगीत के उन गायकों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी अलग आवाज और गायकी के अंदाज से श्रोताओं के बीच विशिष्ट पहचान बनाई। कैलाश खेर ने ‘तेरी दीवानी’, ‘सैयां’, ‘चांद सिफारिश’, ‘या रब्बा’ और ‘अर्जियां’ जैसे गीतों से श्रोताओं के बीच अपनी खास जगह बनाई। उनकी आवाज में लोक संगीत, सूफी परंपरा और आधुनिक संगीत का मेल सुनाई देता है। उन्होंने हिंदी के अलावा कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी गाने गाए हैं। 2007 में उन्हें फिल्म ‘फना’ के गीत ‘चांद सिफारिश’ के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। 2013 में तेलुगु फिल्म ‘मिर्ची’ के गीत के लिए भी उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 2017 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। कोरियोग्राफर से निर्देशक बनीं फराह खान फिल्म निर्देशक फराह खान हिंदी सिनेमा की उन हस्तियों में शामिल हैं, जिन्होंने नृत्य निर्देशन से शुरुआत कर निर्देशन और निर्माण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने वर्ष 1989 में फिल्म ‘जो जीता वही सिकंदर’ के जरिए कोरियोग्राफी के क्षेत्र में काम शुरू किया। इसके बाद ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘मोहब्बतें’ और ‘दिल चाहता है’ जैसी फिल्मों के गानों का नृत्य निर्देशन किया। वर्ष 2004 में फराह खान ने फिल्म ‘मैं हूं ना’ से निर्देशन की शुरुआत की।