जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में गोडावण को बचाने के लिए लोमड़ियों के घर (मांद) तोड़े जाएंगे। सम एरिया को छोड़कर दूसरी जगह जाने के लिए मजबूर किया जाएगा। डेजर्ट फॉक्स ने 18 अक्टूबर को कुंड में पानी पीते समय गोडावण का शिकार कर लिया था। शिकार की जगह से महज 100 मीटर दूर गुफा मिली है। सम एरिया में करीब 30 पानी के कुंड हैं। यहां पक्षी और वन्यजीव पानी पीने आते हैं। ऐसे में 14 अक्टूबर दो गोडावण को खुले जंगल में छोड़ने के बाद अब इस योजना को रोक दिया गया है। वहीं एक्सपर्ट का कहना है कि जंगल में छोड़ने से पहले सही ट्रेनिंग नहीं दी गई। गोडावण के बच्चे करीब 6 महीने तक अपनी मां के साथ रहकर शिकार करना और शिकार होने से बचने की ट्रेनिंग लेते हैं। इंसानों द्वारा ब्रीड तैयार होने से ये ट्रेनिंग नहीं मिल पाई। एक्पसर्ट का मानना है कि यहां मुख्यतः सबसे चालक शिकारी लोमड़ी ही है। हालांकि, यहां कैरेकल भी हैं, लेकिन बहुत कम संख्या में… पढ़िए गोडावण के शिकार के बाद वन-विभाग की प्लानिंग की ये रिपोर्ट.. शिकार की पुष्टि के बाद तत्काल रोकी योजना एसीएफ अशोक सिंह ने बताया- 6 महीने के युवा नर गोडावण का शिकार लोमड़ी ने ही किया है। इस घटना के बाद वन विभाग ने गोडावण को खुले जंगल में छोड़ने की योजना रोक दी है। केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव की ओर से जैसलमेर में शुरू किए गए इस प्रयोग को फिलहाल सुरक्षा कारणों से रोक दिया गया है। एसीएफ अशोक सिंह ने बताया- 1700 वर्ग किलोमीटर में फैले नेशनल पार्क के कुछ हिस्सों में सुरक्षा के लिए तारबंदी की गई है। सम एरिया में करीब 30 पानी के कुंड हैं। यहां पक्षी और वन्यजीव पानी पीने आते हैं। वन्यजीव प्रेमी बोले- ट्रेनिंग की कमी से हुआ हादसा वन्यजीव प्रेमी और एक्सपर्ट सुमित डऊकिया ने कहा- गोडावण के छोटे बच्चे लगभग डेढ़ साल तक अपनी मां के साथ रहते हैं। इस दौरान वे बाहर की दुनिया की कठिनाइयों और खतरों का सामना करना सीखते हैं। संभव है कि इन युवा नर पक्षियों के साथ कोई बड़ा या वयस्क पक्षी नहीं था, जो उन्हें जंगली खतरों से बचने की ट्रेनिंग दे सके। इसी अनुभव की कमी के कारण 6 महीने का यह नर गोडावण लोमड़ी का आसान शिकार बन गया। मरू लोमड़ियां अपने प्राकृतिक रहवास में रहती हैं- सुमेर सिंह वन्यजीव प्रेमी सुमेर सिंह भाटी ने बताया- जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क और आसपास के इलाकों में डेजर्ट फॉक्स यानी मरू लोमड़ियों की अच्छी संख्या है। वन्यजीव गणना और रिपोर्टों के अनुसार, थार के रेगिस्तानी पर्यावरण में इनकी मौजूदगी काफी अधिक है। डेजर्ट नेशनल पार्क कोई बाड़ा या चिड़ियाघर नहीं, बल्कि मीलों तक फैला विशाल और खुला प्राकृतिक रेगिस्तान है। यह मरू लोमड़ियों का मूल और प्राकृतिक रहवास है। ऐसे में वे यहां किसी बाहरी अतिक्रमण की तरह नहीं, बल्कि इस पारिस्थितिकी तंत्र का स्वाभाविक हिस्सा बनकर रहती हैं। --- गोडावण जुड़ीं ये खबर भी पढ़ें … ब्रीडिंग-सेंटर से जंगल में छोड़े गोडावण का 4-दिन बाद शिकार:पानी पीते समय लोमड़ी ने किया हमला, सैटेलाइट ट्रैकिंग से पता चला; 7 को छोड़ना टला जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) में छोड़े गए 6 महीने के गोडावण का मरू लोमड़ी ने शिकार कर लिया। सम (जैसलमेर) के ब्रीडिंग सेंटर में पाले गए इस नर गोडावण को 14 अक्टूबर को छोड़ा गया था। पूरी खबर पढ़िए राजस्थान-ब्रीडिंग सेंटर के 2 गोडावण पहली बार जंगल में छोड़े:करोड़ों की टनल में शिकार करना सीखा; आंखों पर काली-पट्‌टी बांधकर लाए, हड़बड़ाकर भरी उड़ान रामदेवरा (जैसलमेर) के ब्रीडिंग सेंटर (कैप्टिव ब्रीडिंग) के 2 गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) पहली बार जंगल में छोड़े गए हैं। ब्रीडिंग सेंटर में10 गोडावण को ट्रेनिंग दी गई थी। पूरी खबर पढ़िए